लाल कफन में ढका हिड़मा–राजे का शव ,समाज में मिलाकर, आदिवासी परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार; गांव में कड़ी सुरक्षा

लाल कफन में ढका हिड़मा–राजे का शव ,समाज में मिलाकर, आदिवासी परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार; गांव में कड़ी सुरक्षा गंगा गांव में भारी सुरक्षा के बीच अंतिम विदाई

ऑंध्रप्रदेश के माड़ेगुम्मा जंगल में मंगलवार को हुई मुठभेड़ में मारे गए नक्सली हिड़मा और उसकी पत्नी राजे का शव गुरुवार सुबह छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गंगा गांव लाया गया। सुबह से ही गांव में पुलिस और सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी रही। 10 किमी के दायरे में ड्रोन और जवान तैनात किए गए थे।समाज में दोबारा शामिल करने की परंपरा निभाई गईगांव पहुँचने पर दोनों के शवों को सबसे पहले आदिवासी समाज की ‘शामिल जात’ की रस्म के तहत समुदाय में शामिल किया गया।

ग्रामीणों ने बताया कि परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार से पहले मृतक को समाज में पुनः शामिल करना आवश्यक होता है।लाल कफन से ढका गया शव, परंपरागत विधि से अंतिम संस्कार इसके बाद दोनों शवों को लाल कफन से ढका गया। आदिवासी रीति के अनुसार शवों को पहले पानी से नहलाया गया, फिर हल्दी लगाई गई, सल्फी और शराब को शरीर से स्पर्श करवाई गई। गांव के बुजुर्गों ने विधि-विधान पूरे कर अंतिम विदाई दी। बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।

2010 में हुई थी शादी, वर्षों से सक्रिय थे दोनों स्थानीय लोगों के अनुसार हिड़मा और राजे की शादी 2010 में हुई थी। दोनों लंबे समय से सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय थे। ग्रामीणों ने बताया कि नक्सली गतिविधियों के चलते वर्षों पहले उन्हें समाज से बहिष्कृत किया गया था, लेकिन अंतिम संस्कार की रस्मों में परंपरा के अनुसार पुनः समाज में शामिल किया गया। सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। सीआरपीएफ, डीआरजी और जिला पुलिस के जवान पूरे समय तैनात रहे। सुरक्षा बलों ने गांव के आसपास चौकसी और पैदल गश्त बढ़ाई।

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