वनांचल में शिक्षक ने पेश की मिसाल: सरकारी स्कूल को स्मार्ट बनाने हेतु अपने वेतन से खर्च किए ढाई लाख रुपये
गरियाबंद/ शिक्षा के प्रति समर्पण और सेवा भाव की मिसाल पेश करते हुए गरियाबंद जिला के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोसमी के प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक हेमलाल ध्रुव ने अपने प्रयासों से स्कूल को नया स्वरूप दे दिया है। सरकारी संसाधनों की कमी के बीच शिक्षक ध्रुव ने निजी वेतन से लगभग ढाई लाख रुपये खर्च कर विद्यालय को स्मार्ट व आदर्श स्कूल के रूप में विकसित किया है।
वनांचल क्षेत्र के इस सरकारी विद्यालय में भवन की छत की ढलाई, छबाई, पुताई-पेंट, कक्षाओं की मरम्मत, कक्षा सज्जा, आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने सहित कई कार्य उन्होंने अकेले अपने स्तर पर पूरे किए। उनके इस प्रयास से विद्यालय की सुंदरता ही नहीं बढ़ी, बल्कि बच्चों में स्कूल आने का उत्साह भी दोगुना हो गया है। ग्राम कोसमी जैसे दूरस्थ अंचल में जहाँ सरकारी स्कूल अक्सर संसाधनों की कमी से जूझते हैं, ऐसे में शिक्षक की यह पहल ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
ग्रामीणों ने बताया कि हेमलाल ध्रुव की लगन और प्रयासों से विद्यालय का वातावरण पूरी तरह बदल गया है और बच्चों को पढ़ाई के लिए पहले से कहीं बेहतर माहौल मिल रहा है।अभिभावकों और ग्रामवासियों ने इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि शासन को भी ऐसे समर्पित और सेवा भाव रखने वाले शिक्षकों को सम्मानित करना चाहिए, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपने स्तर पर भी योगदान करने से नहीं हिचकते।
स्कूल प्रबंधन तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी शिक्षक की इस पहल को सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बताया है। उनके अनुसार ऐसे कार्य यह साबित करते हैं कि यदि नीयत और प्रयास सच्चे हों तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी सरकारी स्कूलों को उत्कृष्ट रूप दिया जा सकता है।
यशवंत गिरि गोस्वामी, शिक्षाविद सदस्य, प्राथमिक शाला कोसमी“शिक्षक हेमलाल ध्रुव ने जो कार्य किया है वह वास्तव में प्रेरणादायी है। उन्होंने अपने निजी वेतन से स्कूल का कायाकल्प कर यह साबित किया है कि सेवा भाव और समर्पण से किसी भी सरकारी विद्यालय को आदर्श बनाया जा सकता है।”
