जहां डर का राज था, वहां आज तिरंगे की शान नक्सल साये से आज़ादी: गोगुंडा में पहली बार गूंजा राष्ट्रगान
गोगुंडा।जहां कभी नक्सल घटनाओं का खौफ और जंगलों में सन्नाटा पसरा रहता था, वहां आज आज़ादी और लोकतंत्र की आवाज़ गूंज उठी। दशकों बाद गोगुंडा की धरती पर तिरंगा शान से फहराया और जंगलों में पहली बार राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की गूंज सुनाई दी। यह पल न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि लोकतंत्र की उस जीत का प्रतीक भी है, जिसने डर और खामोशी को पीछे छोड़ दिया।
इस बड़ी सफलता के पीछे सीआरपीएफ की 74वीं वाहिनी और जिला पुलिस का अहम योगदान रहा। कमांडेंट हिमांशु पांडे के सशक्त नेतृत्व और पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया, जिसका नतीजा आज पूरे इलाके में साफ नजर आ रहा है।कार्यक्रम के दौरान बुजुर्गों की आंखों में खुशी के आंसू थे, तो बच्चों के चेहरों पर बेफिक्री भरी मुस्कान।
वर्षों से लाल आतंक की पहचान से जूझ रहा गोगुंडा अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है—संविधान, तिरंगे और लोकतांत्रिक मूल्यों की पहचान।गोगुंडा ने आज यह साबित कर दिया कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, जब सुरक्षा बलों का संकल्प और प्रशासन की इच्छाशक्ति साथ हो, तो बदलाव मुमकिन है। अब यह इलाका डर नहीं, बल्कि विकास, शांति और राष्ट्रभक्ति की मिसाल बन रहा है।
