डोंगरगढ़ में आस्था और विकास का संगम: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिया गांवों के सशक्तिकरण का संदेश

डोंगरगढ़ में आस्था और विकास का संगम: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिया गांवों के सशक्तिकरण का संदेश

डोंगरगढ़ | छत्तीसगढ़ की धर्म नगरी डोंगरगढ़ में मंगलवार को आस्था, संस्कृति और विकास का अनूठा संगम देखने को मिला। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जैन आचार्य विद्यासागर महाराज की स्मृति में आयोजित समाधि महोत्सव में भाग लिया और उनके जीवन व विचारों पर आधारित प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय म्यूजियम का भूमिपूजन किया।

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ पहुंचकर केंद्रीय मंत्री ने आचार्य विद्यासागर महाराज के समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद संतोष पांडे सहित अनेक जनप्रतिनिधि, साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद प्रस्तावित म्यूजियम का शिलान्यास किया गया।

इस दौरान जैन समाज और मां बमलेश्वरी ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आचार्य विद्यासागर महाराज को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की मांग रखी।समारोह के पश्चात केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान विश्व प्रसिद्ध मां बमलेश्वरी देवी मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने माता रानी की विधिवत पूजा कर देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे।

भावुक होते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा,“डोंगरगढ़ में आचार्य विद्यासागर जी का समाधि स्थल आज भी जीवंत प्रतीत होता है। उनके स्वदेशी, सादगी और आत्मनिर्भरता के विचार आज के भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।”ग्रामीण विकास को लेकर मंत्री चौहान ने केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि GRAMG योजना के माध्यम से गांवों के स्थायी विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मनरेगा की कमियों को दूर करते हुए अब 100 दिनों की जगह 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा तथा इसके लिए 1 लाख 51 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ग्राम सभाएं स्वयं तय करेंगी कि गांव में कौन से विकास कार्य प्राथमिकता से किए जाएंगे।कुल मिलाकर, केंद्रीय मंत्री का यह डोंगरगढ़ दौरा आचार्य विद्यासागर महाराज की स्मृति को नमन करने के साथ-साथ ग्रामीण सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के मजबूत संदेश के साथ संपन्न हुआ।

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