मातृभाषा में शिक्षण से सशक्त हो रहा प्राथमिक शिक्षा का आधार
कोंडागांव।प्राथमिक विद्यालय स्तर पर मातृभाषा में शिक्षण बच्चों की समझ, सहभागिता और सीखने की क्षमता को सुदृढ़ करने का अत्यंत कारगर माध्यम सिद्ध हो रहा है। इस शैक्षणिक फार्मूले का शत-प्रतिशत सफल उपयोग शासकीय प्राथमिक शाला खुटपारा, सोनाबाल संकुल, तहसील मर्दापाल, विकासखंड एवं जिला कोंडागांव में देखने को मिल रहा है, जहाँ प्रधान अध्यापक हितेंद्र कुमार श्रीवास द्वारा अभिनव पहल की गई है।

उल्लेखनीय है कि इस विद्यालय में कुल 43 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 20 बालिकाएं एवं 23 बालक शामिल हैं। इनमें 05 विद्यार्थी अन्य पिछड़ा वर्ग (लोहार एवं गडबा जाति) से हैं, जबकि शेष 38 विद्यार्थी अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित हैं। विद्यार्थियों की सामाजिक एवं भाषाई पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में शिक्षण माध्यम के रूप में स्थानीय हल्बी बोली को अपनाया गया है।प्रधान अध्यापक द्वारा संपूर्ण शिक्षण एवं संवाद विद्यार्थियों की मातृभाषा हल्बी में ही किया जाता है, जिससे बच्चे सहजता से अपनी बात रख पा रहे हैं और पढ़ाई में सक्रिय सहभागिता कर रहे हैं।
इसका एक सजीव उदाहरण हाल ही में सम्पन्न पाँच दिवसीय ‘दियारी’ तिहार के पश्चात देखने को मिला, जब विद्यार्थियों से उनके त्योहार से जुड़े अनुभव मातृभाषा में साझा कराए गए। इससे न केवल उनकी अभिव्यक्ति क्षमता निखरी, बल्कि वे अपनी स्थानीय संस्कृति से भी और अधिक जुड़ सके।गौरतलब है कि प्रधान अध्यापक हितेंद्र कुमार श्रीवास ने शिक्षण को सरल, सहज और प्रभावी बनाने के लिए विद्यार्थियों की मातृभाषा सीखने में अथक परिश्रम किया और उसमें दक्षता प्राप्त की। इसी क्रम में उन्होंने ‘मातृभाषा में शिक्षण’ विषय पर एक स्वरचित एवं मौलिक कविता की रचना कर उसे फ्लैक्स के रूप में प्रकाशित कराया तथा खंड स्रोत समन्वयक केंद्र, कोंडागांव को सप्रेम भेंट किया, ताकि अन्य शिक्षक भी इस नवाचारी दिशा में प्रेरित हो सकें।
निष्कर्षमातृभाषा में शिक्षण से विद्यार्थियों की सहभागिता, आत्मविश्वास एवं सीखने की रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। शासकीय प्राथमिक शाला खुटपारा की यह पहल न केवल क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम भी है।
