रायपुर में वामपंथी उग्रवाद पर सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षताकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बोले— 31 मार्च 2026 से पहले देश होगा पूरी तरह नक्सल-मुक्त
रायपुर, 8 फरवरी 2026। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) पर एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की भी समीक्षा की।बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव, आईबी निदेशक, गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा), छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव, सीआरपीएफ, एनआईए, बीएसएफ, आईटीबीपी के महानिदेशक सहित छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेशक उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की सुरक्षा-केंद्रित रणनीति, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर करारा प्रहार और आत्मसमर्पण नीति के कारण जमीन पर सकारात्मक और ठोस परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि 31 मार्च 2026 से पहले देश पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो जाएगा।श्री शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ हुआ करता था, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन सरकार के तहत आज यह राज्य विकास का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा आज खेल, फॉरेंसिक साइंस और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, साथ ही अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी सहेज रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार देश से माओवाद की समस्या को पूरी तरह समाप्त करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। नक्सलवाद ने कई पीढ़ियों को गरीबी और अशिक्षा के अंधकार में धकेला, लेकिन अब देश इससे निश्चित रूप से निजात पाने वाला है।उन्होंने माओवाद के खिलाफ लड़ाई को समन्वित और संगठित रखने पर जोर देते हुए कहा कि यह संघर्ष बिखरा हुआ नहीं होना चाहिए। राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है, ताकि शेष बचे नक्सली एक राज्य से दूसरे राज्य में भाग न सकें।
श्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने सुरक्षा और विकास—दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को भी विकास के समान अवसर मिलें और वे मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ सकें।
