70 साल की प्रतीक्षा टूटी: बैलाडीला की गोद में बसे बस्सी लावा पहुँचे विधायक चैतराम अटामी, विकास की पहली दस्तक

70 साल की प्रतीक्षा टूटी: बैलाडीला की गोद में बसे बस्सी लावा पहुँचे विधायक चैतराम अटामी, विकास की पहली दस्तक

दंतेवाड़ा। बैलाडीला की ऊँची पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा दूरस्थ गांव बस्सी लावा वर्षों से मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहा था। आज़ादी के सात दशक बाद भी जहां सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें सपना थीं, वहां पहली बार क्षेत्र के विधायक चैतराम अटामी के कदम पड़े तो ग्रामीणों की आंखों में उम्मीद की चमक साफ दिखाई दी।विधायक अटामी ने गांव पहुंचकर न केवल हालात का जायजा लिया, बल्कि विकास की ठोस शुरुआत भी की।

उन्होंने आंगनवाड़ी भवन, प्राथमिक स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण कार्यों का विधिवत भूमि पूजन कर बस्सी लावा के भविष्य की नींव रखी। यह केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि उस विश्वास की स्थापना थी जिसका इंतजार ग्रामीण वर्षों से कर रहे थे।कार्यक्रम के दौरान जरूरतमंद परिवारों को गंजी, बर्तन, कपड़े एवं दैनिक उपयोग की सामग्री वितरित की गई। यह सहयोग भले ही प्रतीकात्मक लगे, लेकिन दूरस्थ अंचल के लिए यह संवेदनशीलता और सहभागिता का संदेश था।इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुडामी, उपाध्यक्ष अरविंद कुंजाम, बचेली मंडल अध्यक्ष अमलेंदु चक्रवर्ती, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष रमेश गावड़े, पूर्व उपाध्यक्ष शकुलदीप ठाकुर, गीदम पार्षद सूरज सिंह ठाकुर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।ग्रामवासियों ने पारंपरिक तरीके से विधायक का स्वागत किया और वर्षों से लंबित मांगों के पूर्ण होने पर आभार व्यक्त किया।

बुजुर्गों की आंखों में संतोष और युवाओं के चेहरे पर उम्मीद साफ झलक रही थी।दंतेवाड़ा में बदलाव की बयार अब पहाड़ों को पार कर दूरस्थ गांवों तक पहुंचती दिख रही है। बस्सी लावा का यह दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस भरोसे की पुनर्स्थापना है कि शासन-प्रशासन अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।बैलाडीला की वादियों में आज विकास की एक नई किरण उतरती दिखाई दी।

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