एलबी टैग खत्म: अब शिक्षाकर्मी कहलाएंगे शिक्षक और व्याख्याता, एकीकृत वरिष्ठता से एजुकेशन
भिलाई/ shiksha विभाग में लागू नई भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026 ने वर्षों से चली आ रही विसंगतियों पर निर्णायक विराम लगा दिया है। अब शिक्षक एलबी, व्याख्याता एलबी और प्रधान पाठक एलबी जैसे अलग-अलग टैग समाप्त कर दिए गए हैं। सभी को क्रमशः सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता और प्रधान पाठक का समान पदनाम दिया जाएगा।सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब नियमित शिक्षक और एलबी शिक्षक के बीच का भेद पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। व्याख्याता और प्रधान पाठक पदों पर भर्ती व पदोन्नति अब एक ही संयुक्त वरिष्ठता सूची के आधार पर होगी। इससे वर्षों से चला आ रहा सीनियर-जूनियर विवाद समाप्त होने की उम्मीद है।
क्या थी पहले की समस्या? वर्ष 2019 में बनाए गए पदोन्नति नियमों में शिक्षकों को अलग-अलग वरिष्ठता सूचियों में बांट दिया गया था।शिक्षक/शिक्षक एलबी व्याख्याता/व्याख्याता एलबी प्रधान पाठक/प्रधान पाठक एलबी इस विभाजन के कारण वरिष्ठ नियमित व्याख्याताओं और प्रधान पाठकों की अनदेखी कर जूनियरों को पदोन्नति का लाभ मिल रहा था। कई मामलों में 15-20 वर्षों से सेवा दे रहे वरिष्ठ शिक्षकों को अपने से कम अनुभव वाले अधिकारियों के अधीन कार्य करना पड़ा। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष था।
न्यायालय की शरण तक पहुंचे शिक्षक विसंगतियों को दूर करने के लिए वर्ष 2020 से शासन-प्रशासन को लगातार ज्ञापन दिए गए। समाधान न निकलने पर सैकड़ों शिक्षकों ने उच्च न्यायालय की शरण ली। वर्ष 2023 और जुलाई 2025 में न्यायालय ने वरिष्ठ शिक्षकों के पक्ष में निर्णय भी दिया, लेकिन व्याख्या को लेकर विवाद बना रहा।हालिया पदोन्नति सूची में पाँच वर्ष के व्याख्याता एलबी और जूनियर प्रधान पाठक प्राचार्य बन गए, जबकि लंबे समय से कार्यरत वरिष्ठ प्रधान पाठक पीछे रह गए। इससे शिक्षा जगत में व्यापक असंतोष था।
अब क्या बदला?नई नियमावली 2026 में—
🔹 एलबी टैग समाप्त
🔹 सभी के लिए समान पदनाम
🔹 संयुक्त वरिष्ठता सूची से पदोन्नति
🔹 सीनियर-जूनियर विवाद खत्म
🔹 समानता और न्याय की भावना को बढ़ावायह निर्णय शिक्षा विभाग में लंबे समय से चली आ रही असमानता को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
सरकार के प्रति जताया आभार राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री एवं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के प्रति आभार व्यक्त किया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी चेलक, संगठन महामंत्री बोधराम निषाद, शिक्षा प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष ज्ञान सिंह राजपूत सहित जिला प्रतिनिधियों ने इसे शिक्षकों के हित में बड़ा और न्यायसंगत कदम बताया है।
