लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का आदेश गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति तत्काल रद्द करने के निर्देश

लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का आदेश गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति तत्काल रद्द करने के निर्देश

रायपुर/ राज्य के स्कूल शिक्षा तंत्र में बड़ा प्रशासनिक निर्णय सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षकों और कर्मचारी संवर्ग पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी संभागीय संयुक्त संचालकों (JD) और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को दो टूक निर्देश जारी किए हैं।स्पष्ट आदेश दिया गया है कि विभिन्न कार्यालयों एवं संस्थाओं में संलग्न शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए और उन्हें उनकी मूल पदस्थापना शालाओं में अनिवार्य रूप से कार्यमुक्त कर वापस भेजा जाए।

सात दिन में देनी होगी अनुपालन रिपोर्टजारी निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि की गई कार्रवाई का प्रमाण पत्र सात दिवस के भीतर संचालक, लोक शिक्षण को भेजना अनिवार्य होगा।इससे संकेत मिल रहे हैं कि इस बार केवल आदेश जारी करने तक ही मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अनुपालन की कड़ी मॉनिटरिंग भी की जाएगी।शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने पर जताई चिंताDPI ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अपनी मूल शालाओं को छोड़कर विभिन्न विभागीय कार्यालयों में गैर शिक्षकीय कार्यों में लगे हुए हैं।

इससे विद्यालयों में अध्यापन व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जो राज्य की शिक्षा गुणवत्ता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।संचालनालय ने इसे प्रशासनिक अनुशासन और शैक्षणिक हित दोनों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।28 फरवरी 2024 के आदेश का हवालायह कार्रवाई स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 28 फरवरी 2024 को जारी निर्देशों के संदर्भ में की गई है। उस समय भी शासन स्तर से DPI, कमिश्नर, कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षकों को मूल पदस्थापना में लौटाने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि पूर्व में ऐसे आदेश कई बार जारी हुए, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर कुछ समय बाद पुनः प्रतिनियुक्ति या डिप्टेशन दिए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस बार सख्ती के संकेतनवीनतम आदेश में स्पष्ट समय-सीमा और प्रमाण पत्र अनिवार्यता यह दर्शाती है कि इस बार प्रशासनिक सख्ती पहले से अधिक हो सकती है। यदि निर्देशों का कड़ाई से पालन हुआ तो विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और अध्यापन कार्य में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदमशिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर कक्षाओं में वापस लाने का यह निर्णय शिक्षा गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन कितना प्रभावी रहता है।

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