कान्हा में पाँचवाँ एग्रोबायोडायवर्सिटी राउंडटेबल सम्पन्न
मिलेट्स को लेकर पोषण, जलवायु लचीलापन और आजीविका पर गहन मंथननेटवर्क फॉर कंज़र्विंग सेंट्रल इंडिया (एनसीसीआई) द्वारा 29–30 जनवरी 2026 को कान्हा टाइगर रिज़र्व के मोचा गाँव स्थित अरण्यक रिसॉर्ट में “मिलेट्स इन द सेंट्रल इंडियन लैंडस्केप” विषय पर पाँचवाँ एग्रोबायोडायवर्सिटी राउंडटेबल आयोजित किया गया।
इस दो-दिवसीय संवाद में सिविल सोसाइटी संगठनों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), शोधकर्ताओं, संरक्षण प्रैक्टिशनर्स और समुदाय नेतृत्वकर्ताओं ने सहभागिता की।कार्यक्रम का उद्घाटन एनसीसीआई की फाउंडर-डायरेक्टर प्रो. रूथ डेफ्रीज़ ने किया। उन्होंने कहा, “मिलेट्स पोषण, जलवायु लचीलापन और आजीविकाओं के संगम पर स्थित हैं। उनका भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम ज़मीनी हकीकत को साक्ष्य, बुनियादी ढाँचे और दीर्घकालिक समुदाय स्वामित्व से कितनी प्रभावी ढंग से जोड़ पाते हैं।
”एनसीसीआई की प्रोग्राम लीड मानसी मोंगा ने पिछले चार राउंडटेबल्स की सीख साझा करते हुए पाँचवें राउंडटेबल की रूपरेखा प्रस्तुत की।राउंडटेबल का उद्देश्य मध्य भारत के वन–कृषि परिदृश्य में एग्रोबायोडायवर्सिटी को संरक्षण, खाद्य प्रणालियों और ग्रामीण आजीविकाओं से जोड़ते हुए आगे की रणनीतियाँ तय करना रहा। सत्रों के दौरान मिलेट-आधारित आजीविकाओं, स्थानीय आहार सुदृढ़ीकरण और खाद्य सुरक्षा पर व्यावहारिक उपायों के साथ-साथ विज्ञान आधारित समाधान पर चर्चा हुई।विशेष सत्र में कोदो मिलेट में मतोना संदूषण की चुनौती पर प्रो. रूथ डेफ्रीज़, डॉ. मनोज चौधरी (आईसीएआर, नई दिल्ली), डॉ. हरि किशन सुदिनी एवं डॉ. मानसा मारुति (इक्रीसेट, हैदराबाद) ने वैज्ञानिक प्रगति साझा की। विभिन्न मिट्टी प्रकारों में ट्राइकोडर्मा आधारित बायो-कंट्रोल्ड फील्ड ट्रायल्स, नमी, भंडारण प्रक्रियाओं और बीज की उम्र की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गईं।
विज्ञान टीम ने साइक्लोपियाज़ोनिक एसिड (सीपीए) की पहचान हेतु विकसित किए जा रहे लेटरल फ्लो इम्यूनोअस्से आधारित डायग्नोस्टिक टेस्ट पर भी अपडेट दिया, जो समयबद्ध और किफायती जांच की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। चर्चा में यह निष्कर्ष उभरा कि मिलेट्स के पुनरुद्धार के साथ किसानों की आजीविका और बाज़ार विश्वास बनाए रखने के लिए ठोस साक्ष्य, विश्वसनीय परीक्षण तंत्र और मजबूत बुनियादी ढाँचा अनिवार्य हैं।
राउंडटेबल का समापन आने वाले वर्ष के लिए सामूहिक चिंतन के साथ हुआ, जिसमें परिदृश्य-स्तरीय लेबल को दीर्घकालिक, किसान-स्वामित्व वाली पहचान के रूप में आगे बढ़ाने तथा प्रोसेसिंग निरंतरता और खाद्य सुरक्षा पर सहयोगी शोध को मजबूत करने का संकल्प दोहराया गया।
