विधानसभा में गरजे कवासी लखमा, किसानों-आदिवासियों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

विधानसभा में गरजे कवासी लखमा, किसानों-आदिवासियों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

रायपुर। राज्यपाल के अभिभाषण पर विधानसभा में चर्चा के दौरान विधायक कवासी लखमा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार के दो साल पूरे होने के बावजूद प्रदेश का किसान सबसे ज्यादा परेशान है और धान खरीदी में गंभीर अव्यवस्था देखने को मिल रही है।चर्चा में भाग लेते हुए लखमा ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद अंग्रेजों के समय में भी किसान इतने परेशान नहीं थे, जितनी दिक्कतें आज धान खरीदी में आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री बनने से आदिवासी समाज को खुशी जरूर हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं। एसडीएम द्वारा आदिवासी व्यक्ति की पिटाई जैसे मामलों पर उन्होंने चिंता जताई।उन्होंने कहा कि सरकार के पहले साल से ही हड़तालों का दौर शुरू हो गया, जो प्रशासनिक असफलता को दर्शाता है। हालांकि उन्होंने गृहमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र में शांति का माहौल बना है, जिससे लोग खुश हैं, लेकिन अबूझमाड़, जंगल और पहाड़ों के भविष्य को लेकर लोगों में चिंता है।लखमा ने कहा कि आदिवासी समाज जंगल को पूजता है और “जंगल है तो जीवन है”, इसलिए जंगल और परंपराओं से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने आदिवासी त्योहारों की प्रस्तुति पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लोगों को भटकाने का आरोप लगाया।जल जीवन मिशन और पंचायत व्यवस्था पर सवालउन्होंने कहा कि कई जगह जल जीवन मिशन सही ढंग से लागू नहीं हुआ है। कहीं पानी नहीं मिल रहा, तो कहीं पाइपलाइन खराब पड़ी है। पंचायतों को पर्याप्त राशि नहीं मिलने और सरपंचों के अधिकार सीमित होने का भी आरोप लगाया।वनाधिकार, सड़क और बिजली पर घेरावनाधिकार पट्टा वितरण की मांग करते हुए उन्होंने वन मंत्री से आदिवासियों को पट्टा देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में सत्ता अधिकारियों के हाथ में ज्यादा दिख रही है और सड़क निर्माण के कई कार्य रुके हुए हैं। उनकी विधानसभा में चार पुलों का निर्माण सरकार बदलने के बाद रोक दिए जाने का आरोप भी लगाया।बिजली बिल बढ़ने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि आम जनता के बिल हजारों रुपये तक पहुंच रहे हैं। तेंदूपत्ता खरीदी, वनोपज समर्थन मूल्य और बस्तर क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पहले इमली, महुआ सहित 52 प्रकार के वनोपज की खरीदी होती थी, लेकिन अब व्यवस्था कमजोर पड़ गई है।

कानून व्यवस्था और विकास पर उठाए सवालउन्होंने प्रदेश में अपराध बढ़ने, रेप और गोलीबारी की घटनाओं पर चिंता जताई। साथ ही बस्तर में रेल लाइन निर्माण और केशकाल घाटी बायपास को जल्द पूरा करने की मांग की।

अंत में कवासी लखमा ने सरकार से बिजली बिल कम करने, किसानों को राहत देने और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने की मांग की।

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