बीएसपी प्रबंधन के विरोध में 22 मार्च को पैदल मार्च, आवास सुरक्षित रखने का लिया संकल्प

बीएसपी प्रबंधन के विरोध में 22 मार्च को पैदल मार्च, आवास सुरक्षित रखने का लिया संकल्पभिलाई नगर। भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन की हाउस लीज और रिटेंशन स्कीम के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। “भिलाई नहीं बिकने देंगे” अभियान के तहत रविवार को सेक्टर-2 स्थित शक्ति सदन में जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लीज और रिटेंशन के तहत आवंटित आवासों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि बीएसपी प्रबंधन ने दो माह बाद भी हाउस लीज और रिटेंशन स्कीम की बढ़ी हुई दरों से संबंधित आदेश वापस नहीं लिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर में प्रबंधन ने 15 दिनों के भीतर उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।उन्होंने बताया कि आंदोलन को वार्ड स्तर से आगे बढ़ाते हुए अब पैदल मार्च का निर्णय लिया गया है। यह पदयात्रा 22 मार्च को सिविक सेंटर से प्रारंभ होकर सेंट्रल एवेन्यू होते हुए सेक्टर-2 भिलाई विद्यालय मैदान में समाप्त होगी।संवाद कार्यक्रम में बीएसपी के सेवानिवृत्त कर्मचारी, लीज और रिटेंशनधारियों ने किराये की दर में 24 रुपये प्रति वर्गफीट की वृद्धि को अमानवीय बताया। साथ ही बिजली, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं भी उठाईं।

आंदोलन को जारी रखने और बढ़ा हुआ किराया नहीं देने पर जोर दिया गया।सीनियर सिटीजन ने सेक्टर-9 स्थित पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय में इलाज के दौरान होने वाली परेशानियों से अवगत कराया। वहीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए आवास की वैकल्पिक व्यवस्था दो माह के बजाय दो वर्ष तक जारी रखने की मांग रखी गई। युवाओं से भी अपने हक और अधिकार के लिए आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया गया।इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष सौरभ मिश्रा, एमआईसी सदस्य लक्ष्मीपति राजू, पार्षद नोमिन साहू, पार्षद साधना सिंह, राजेंद्र परगनिहा, हरीश सिंह, अभिषेक अवस्थी सहित हाउस लीज संघर्ष समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि विधायक देवेंद्र यादव ने दिसंबर में सिविक सेंटर में पांच दिन का उपवास कर आंदोलन की शुरुआत की थी। इसके बाद जिला प्रशासन की मौजूदगी में त्रिपक्षीय चर्चा हुई, जिसमें सेक्टर-9 अस्पताल को लीज पर नहीं देने, कर्मचारियों की सुविधाएं यथावत रखने तथा मैत्री बाग को किसी भी संस्थान को नहीं देने पर सहमति बनी थी। हालांकि रिटेंशन स्कीम को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद आंदोलन लगातार जारी है।

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