पंचायतों को मिला बड़ा अधिकार- अब नामांतरण और बंटवारा के लिए तहसील जाने की झंझट खत्म ग्रामीणों को अब अपने खेत-खलिहान और जमीन के अविवादित नामांतरण व बंटवारे के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। शासन ने प्रशासन का सरलीकरण करते हुए यह अधिकार अब सीधे ग्राम पंचायतों को सौंप दिए हैं।
पूरी प्रक्रिया को भुइयां पोर्टल के जरिए ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है।इस नई व्यवस्था को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यहां साइंस कॉलेज स्थित सर्वपल्ली राधाकृष्णन हॉल में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। अतिरिक्त तहसीलदार क्षमा यदु और हुलेश्वर खूंटे ने जिले भर के पटवारियों और पंचायत सचिवों को पोर्टल संचालन की तकनीकी बारीकियां सिखाईं।
इस दौरान संयुक्त कलेक्टर सिल्ली थॉमस, जिला पंचायत सीईओ बजरंग दुबे और तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता विशेष रूप से मौजूद रहे।ऐसी होगी प्रक्रिया
0 आवेदक को अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र में जाकर आवेदन करना होगा।
0 आवेदन होते ही प्रकरण सीधे संबंधित ग्राम पंचायत सचिव की आईडी पर फ्लैश होने लगेगा।
0 सचिव द्वारा पंचायत भवन में ईश्तहार चस्पा किया जाएगा और सभी पक्षकारों को नोटिस जारी होगा।
0 ईश्तहार जारी होने के बाद 23 दिनों का समय आपत्ति दर्ज करने के लिए दिया जाएगा।
0 यदि 23 दिनों में कोई आपत्ति नहीं आती है, तो सचिव नामांतरण की प्रक्रिया पूर्ण कर देंगे। विवाद होने पर मामला नियमानुसार वरिष्ठ कार्यालय भेजा जाएगा।भ्रष्टाचार और देरी पर लगेगी लगामविशेष रूप से फौती नामांतरण के लिए ग्रामीणों को महीनों इंतजार करना पड़ता था। अब पंचायतों को आईडी-पासवर्ड मिल जाने से यह कार्य गांव में ही संपन्न हो जाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि राजस्व कार्यों में पारदर्शिता भी आएगी।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस नई व्यवस्था से राजस्व मामलों के निराकरण में तेजी आएगी और आम जनता को दफ्तरों की भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी।
