प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: राहत की लौ जली, लेकिन शर्तों की आँच में कई वंचित

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: राहत की लौ जली, लेकिन शर्तों की आँच में कई वंचित

दुर्ग/ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत केंद्र सरकार ने देशभर में 25 लाख अतिरिक्त मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देने की घोषणा की है। इसी कड़ी में दुर्ग जिले में भी योजना को ज़मीन पर उतारने की पहल शुरू हो गई है। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर अभिजीत सिंह ने पात्र हितग्राही महिलाओं को गैस कनेक्शन वितरित किए।

गैस कनेक्शन मिलने से महिलाओं के चेहरों पर राहत और खुशी साफ नजर आई। यह योजना उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बनी है, जो अब तक लकड़ी, कोयला और उपलों के धुएं में खाना बनाने को मजबूर थीं। स्वास्थ्य सुरक्षा, समय की बचत और सुरक्षित रसोई की दिशा में इसे एक बड़ा और सराहनीय कदम माना जा रहा है।विजुअल: गैस कनेक्शन वितरण, महिलाओं की खुशी, कार्यक्रम स्थल लेकिन इसी उज्ज्वला योजना का एक दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है।योजना के तहत बनाए गए सख्त पात्रता और बहिष्करण मापदंड कई जरूरतमंद परिवारों को लाभ से दूर कर रहे हैं।

यदि परिवार का कोई सदस्य ₹10,000 प्रतिमाह से अधिक कमाता है ।

यदि 30 वर्ग मीटर से बड़ा पक्का मकान है,यदि चार पहिया या मोटर चालित वाहन मौजूद है।

या पहले से एलपीजी कनेक्शन है—तो ऐसे परिवार स्वतः ही योजना से बाहर कर दिए जाते हैं।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई गरीब परिवारों का कहना है कि उनकी आय स्थायी नहीं है, फिर भी पुराने दस्तावेजों, नाममात्र की संपत्ति या किसी सदस्य के नाम दर्ज वाहन के कारण वे उज्ज्वला योजना के लाभ से वंचित रह जा रहे हैं।स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य सराहनीय और जनहित से जुड़ा हुआ है, और इसका लाभ हजारों महिलाओं तक पहुँच भी रहा है।

लेकिन कड़ी पात्रता और बहिष्करण शर्तों के कारण आज भी कई जरूरतमंद परिवार योजना की दहलीज से बाहर खड़े नजर आते हैं।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या शासन-प्रशासन इन शर्तों की जमीनी हकीकत की समीक्षा करेगा, ताकि उज्ज्वला योजना का लाभ सचमुच हर उस रसोई तक पहुँच सके, जहाँ आज भी धुएं में जीवन गुजर रहा है।

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