महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर प्रवास को लेकर तैयारियां तेज 7 फरवरी बनेगा छत्तीसगढ़ और बस्तर के लिए ऐतिहासिक दिन, बस्तर पंडुम का करेंगी भव्य शुभारंभ

महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर प्रवास को लेकर तैयारियां तेज7 फरवरी बनेगा छत्तीसगढ़ और बस्तर के लिए ऐतिहासिक दिन, बस्तर पंडुम का करेंगी भव्य शुभारंभ

जगदलपुर। 7 फरवरी 2026 का दिन छत्तीसगढ़ सहित बस्तर अंचल के लिए ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। बदलते बस्तर, उसकी समृद्ध कला, संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विधाओं को करीब से देखने और समझने के लिए महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बस्तर प्रवास पर पहुंच रही हैं। महामहिम 7 फरवरी को जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय “बस्तर पंडुम” कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ करेंगी। इसी दिन लालबाग मैदान से बस्तर पंडुम का विधिवत आगाज होगा। कार्यक्रम के दौरान महामहिम राष्ट्रपति बस्तर वासियों को संबोधित भी करेंगी।

तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, पूरा बस्तर अलर्ट महामहिम के बस्तर दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। लालबाग मैदान में तीन लेयर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसके साथ ही महामहिम के प्रवास को ध्यान में रखते हुए पूरे बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों को अलर्ट कर दिया गया है।संभाग भर में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके।

25 हजार से अधिक लोगों की बैठक व्यवस्था बस्तर पंडुम के शुभारंभ कार्यक्रम के लिए एक विशाल मंच तैयार किया गया है। साथ ही तीन बड़े डोम बनाए गए हैं, जिनमें 25 हजार से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। आयोजन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

बस्तर प्रवास पर आने वाली पांचवीं राष्ट्रपति गौरतलब है कि आजादी के बाद अब तक चार राष्ट्रपतियों का बस्तर प्रवास हो चुका है। अब पांचवीं राष्ट्रपति के रूप में महामहिम द्रौपदी मुर्मू बस्तर पहुंच रही हैं। उनके द्वारा 7 फरवरी को बस्तर पंडुम का भव्य शुभारंभ किया जाएगा, जिसे लेकर पूरे अंचल में उत्साह का माहौल है।

प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण मेंमहामहिम राष्ट्रपति के बस्तर प्रवास को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सुरक्षा, यातायात, मंच, आमंत्रण और व्यवस्थाओं को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है।

महामहिम राष्ट्रपति का यह दौरा बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

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