🔹जिले में गिरते जलस्तर पर सख्ती: बिना अनुमति नहीं होगा नलकूप खनन
दुर्ग / जिले में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत आदेश जारी करते हुए बिना अनुमति नए नलकूप (बोरवेल) खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 30 जून अथवा मानसून आगमन तक प्रभावी रहेगा।प्रशासन का कहना है कि गर्मी के मौसम में पेयजल संकट की स्थिति से बचने और भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है, ताकि आम नागरिकों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
केवल अनुमति से ही होगा नलकूप खननआदेश के अनुसार अब जिले में नया नलकूप खनन करने से पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। हालांकि शासकीय, अर्धशासकीय और नगरीय निकायों को अपने क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था के लिए नलकूप खनन की अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन उन्हें निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नलकूप खनन या मरम्मत का कार्य केवल पंजीकृत बोरवेल एजेंसियों के माध्यम से ही कराया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इन अधिकारियों को दी गई अनुमति देने की जिम्मेदारीआदेश के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों के लिए
अधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है—नगर निगम दुर्ग,
भिलाई और रिसाली – अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी दुर्ग राजस्व अनुविभाग दुर्ग के शेष क्षेत्र – अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) दुर्ग
धमधा अनुविभाग – अनुविभागीय अधिकारी धमधा
पाटन अनुविभाग – अनुविभागीय अधिकारी पाटन
भिलाई-3 अनुविभाग क्षेत्र – अनुविभागीय अधिकारी भिलाई-3 प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि भूजल संरक्षण के लिए जारी इस आदेश का पालन करें और अनधिकृत नलकूप खनन से बचें, ताकि गर्मी के मौसम में जिले में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
