प्रशासन की मुस्तैदी,नदी-नाले पार कर रोकी गई 12 वर्षीय बालिका की शादी सुकमा को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प
सुकमा/ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए सुकमा जिला प्रशासन ने मिसाल पेश की है। कलेक्टर अमित कुमार के कुशल मार्गदर्शन में, प्रशासन ने एक दुर्गम क्षेत्र में पहुंचकर न केवल एक मासूम का भविष्य बचाया, बल्कि समाज को कड़ा संदेश भी दिया है।

दुर्गम रास्तों को मात देकर पहुंची रेस्क्यू टीम 2 जनवरी की सुबह प्रशासन को सूचना मिली कि सुकमा विकासखंड के ग्राम पंचायत रामाराम के अंतर्गत आने वाले सुदूर और पहुँच विहीन गांव नाड़ीगुफ़ा में एक 12 वर्षीय बालिका का विवाह होने जा रहा है। सूचना मिलते ही जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम के नेतृत्व में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और सेक्टर सुपरवाइजर की एक संयुक्त टीम गठित की गई। गांव तक पहुंचने का रास्ता चुनौतियों से भरा था।

टीम ने उफनते नदी-नालों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों की परवाह न करते हुए पैदल ही नाड़ीगुफा गांव तक का सफर तय किया।*कानूनी समझाइश और ग्रामीणों का सहयोग*गांव पहुंचने पर टीम ने पाया कि स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह की तैयारियां पूर्ण कर ली गई थीं। अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए परिजनों और ग्रामीणों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों और इससे होने वाले कानूनी परिणामों की जानकारी दी।
प्रशासन की प्रभावी समझाइश का सकारात्मक असर हुआ। परिजनों ने स्वेच्छा से विवाह रोकने का निर्णय लिया और ग्रामीणों की उपस्थिति में विधिवत पंचनामा तैयार किया गया। शिक्षा की ओर बढ़ते कदम केवल विवाह रोकना ही टीम का लक्ष्य नहीं था। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बालिका को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए परिजनों को प्रेरित किया। शासन की मंशा है कि राज्य का हर पंचायत ‘बाल विवाह मुक्त’ घोषित हो, ताकि जिले का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
रेस्क्यू टीम में शामिल सदस्य कार्यवाही में संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख) सुश्री मनीषा शर्मा, सेक्टर सुपरवाइजर सुश्री निशा साहू, सामाजिक कार्यकर्ता जोगेंद्र दिर्दो, लोकेश्वरी काउंसलर, चाइल्ड लाइन सुपरवाइजर सुश्री मल्लिका सोड़ी, केश वर्कर मुड़ा पोडियामी एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।
