कबीरधाम में दो दिवसीय पशु आहार प्रशिक्षण संपन्न, किसानों को मिली नई तकनीकों की जानकारी

कबीरधाम। दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर के सहयोग से ग्राम रामपुर (कबीरधाम) में “यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक एवं संपूर्ण पशु आहार बनाने की तकनीक, पशु आहार प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास” विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।19-20 मार्च 2026 को आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों एवं पशुपालकों को वैज्ञानिक पशु आहार निर्माण, कम लागत में संतुलित आहार तैयार करने की तकनीक तथा उद्यमिता विकास के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रुखमणी सोमलाल कौशिक ने अपने संबोधन में पशु आहार निर्माण को ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए किसानों को नवाचार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. महेन्द्र चंद्रवंशी ने वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से कृषि एवं पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने पर जोर दिया।इस अवसर पर ग्राम रामपुर के सरपंच गोपाल नेताम एवं पूर्व सरपंच सुरेश सिंह ने भी प्रशिक्षण की उपयोगिता बताते हुए किसानों से प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में लाने का आग्रह किया।कार्यक्रम में डॉ. मनोज कुमार गेंदले ने कम लागत में संतुलित पशु आहार निर्माण एवं उद्यमिता विकास पर विस्तार से जानकारी दी।
साथ ही डॉ. आशुतोष तिवारी एवं डॉ. जितेन्द्र जाखड़ की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक एवं संपूर्ण पशु आहार निर्माण की तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी और किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया। प्रतिभागियों ने स्वयं पशु आहार बनाकर सीखा, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और वे इसे अपने स्तर पर अपनाने के लिए सक्षम हुए।इसके अलावा डेयरी, कुक्कुट एवं बकरी पालन प्रबंधन, पशुओं की बीमारियों की रोकथाम तथा कम लागत में संतुलित आहार निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों एवं पशुपालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोनाली पुष्टि द्वारा किया गया, जिन्होंने अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों एवं पशुपालकों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
