नक्सल प्रभावित सालातोंग में विकास की बयार, अब हर घर बह रहा स्वच्छ जल

नक्सल प्रभावित सालातोंग में विकास की बयार, अब हर घर बह रहा स्वच्छ जल

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को पेयजल संकट से मिली बड़ी राहत

रायपुर/कभी नक्सल समस्या और भीषण पेयजल संकट से जूझने वाला सुकमा जिले का दूरस्थ ग्राम सालातोंग आज विकास की नई मिसाल बन गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन ने इस गांव की तस्वीर बदल दी है—अब यहां हर घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है।15 अगस्त 2019 को शुरू हुए इस मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण को प्रतिदिन 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है।

कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में नियद नेल्लानार योजना के तहत कोंटा ब्लॉक के इस सुदूर गांव में तेज़ी से कार्य करते हुए लगभग 100 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाया गया।संघर्ष से समाधान तक का सफरकोंटा से करीब 100 किमी और जिला मुख्यालय सुकमा से 90 किमी दूर स्थित सालातोंग के ग्रामीण वर्षों तक एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मियों में जलस्तर गिरने से पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती थी।

अब घर-घर नल, जीवन में बदलावजल जीवन मिशन के लागू होने के बाद:हर घर तक शुद्ध पेयजल की पहुंच सुनिश्चित हुईजलजनित बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आईग्रामीणों की दिनचर्या सरल और सुरक्षित बनीमहिलाओं की भागीदारी से मजबूत हुई व्यवस्थागांव में “जल बहिनियों” की सक्रिय भागीदारी इस योजना की खास सफलता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और शिक्षित महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है।

अब वे स्वयं पानी की जांच कर सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही हैं।सतत जल प्रबंधन की दिशा में कदमसालातोंग में सोलर आधारित जल आपूर्ति प्रणाली और हैंडपंप के जरिए जल संरक्षण और जल सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण से ग्रामीणों को निरंतर स्वच्छ पानी मिल रहा है।ग्रामीणों ने जताया आभारगांव के लोगों का कहना है कि अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता—घर में ही नल से पानी मिल रहा है, जिससे जीवन आसान और सुरक्षित हो गया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।सालातोंग की यह कहानी बताती है कि जब सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो सबसे दूर और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विकास की रोशनी पहुंचती है।

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