विश्व आयुर्वेद परिषद, दिल्ली प्रान्त द्वारा विश्व मंगल दिवस का भव्य आयोजन
दिल्ली। विश्व आयुर्वेद परिषद, दिल्ली प्रान्त के तत्वावधान में विश्व मंगल दिवस का भव्य एवं सफल आयोजन प्रेमाधार आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट एवं हॉस्पिटल, दीप बिहार, रोहिणी सेक्टर-22 में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में आयुर्वेद के विविध आयामों, उसकी समकालीन प्रासंगिकता तथा समाज में उसके व्यापक योगदान पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली के कौमारभृत्य विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत गुप्ता एवं एस.जी.टी. यूनिवर्सिटी के काय चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर डॉ. रेखा फुल ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधनों से श्रोताओं को संबोधित किया। उन्होंने आयुर्वेद की वैज्ञानिकता, बाल स्वास्थ्य, जीवनशैली रोगों तथा समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में NCISM के माननीय सदस्य प्रोफेसर डॉ. नारायण जाधव, प्रोफेसर डॉ. के.के. द्विवेदी, चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के प्रोफेसर डॉ. गौरव फुल, स्वामी वैद्यशाला के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. स्वामीनाथ मिश्रा, ईएसआईसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. महामृत्युंजय पाण्डे, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा ठाकुर तथा एसजीटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एवं विश्व आयुर्वेद परिषद दिल्ली प्रान्त के उपाध्यक्ष डॉ. अबनीश पाठक विशेष रूप से उपस्थित रहे।इसके अतिरिक्त डॉ. शुभम रोहिल्ला, डॉ. अवधेश पाण्डे, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. भुवनेश गोयल, डॉ. हिमांशु तिवारी, डॉ. विजय कौशिक, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. नीतिका, डॉ. अजय तिवारी एवं डॉ. अभिषेक अवस्थी सहित अनेक प्रतिष्ठित आयुर्वेद चिकित्सकों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।कार्यक्रम का शुभारंभ दिल्ली प्रान्त की महासचिव वैद्य संघमित्रा दाश के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने विश्व मंगल दिवस की भावना तथा आयुर्वेद के मानव-कल्याणकारी स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। समापन अवसर पर अध्यक्ष वैद्य नामाधार शर्मा ने विश्लेषणात्मक वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के लिए सहभोज का आयोजन किया गया।
यह आयोजन आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार, वैज्ञानिक संवाद एवं चिकित्सकों के आपसी समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।
