मैत्रेयी महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परम्परा संगोष्ठी के द्वितीय दिवस पर 120 से अधिक शोध-पत्रों की ऑनलाइन प्रस्तुतियाँ

नई दिल्ली/दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध मैत्रेयी महाविद्यालय में आयोजित “भारतीय ज्ञान परम्परा : अंतर्विषयक परिप्रेक्ष्य” विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिवस पर तकनीकी सत्रों का प्रभावी एवं सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि उद्घाटन सत्र के उपरांत प्रथम दिवस पर पूर्णतः ऑफलाइन माध्यम में 91 शोध-पत्रों का वाचन एवं पोस्टर प्रस्तुतीकरण सम्पन्न हुआ, जिसमें द्वितीय सत्र की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर प्रो. दयाशंकर तिवारी द्वारा की गई।
इस अवसर पर आमंत्रित विद्वानों एवं निर्णायकों दिल्ली विश्वविद्यालय के उप अधिष्ठाता, छात्र कल्याण डॉ. चन्द्र प्रकाश, दिल्ली विश्वविद्यालय के उप कुलानुशासक डॉ. सौरभ, दिल्ली विश्वविद्यालय की उप अधिष्ठाता, छात्र कल्याण डॉ. निधि एस. चन्द्रा, इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड साइंसेज़ (यूएसए) के स्कूल ऑफ इंडिक स्टडीज़ की सहायक प्राध्यापिका डॉ. अपर्णा धीर, गोवर्दांग हिन्दू कॉलेज, पश्चिम बंगाल की प्राध्यापिका एवं काउंसिल ऑफ इंडिक स्टडीज़ एंड रिसर्च की उप-निदेशक डॉ. स्मृति सरकार तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्राध्यापक एवं वैदिक विज्ञान एवं आयुर्वेद केन्द्र, काउंसिल ऑफ इंडिक स्टडीज़ एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. अभिनीत कुमार श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति रही।
द्वितीय दिवस को संगोष्ठी के अंतर्गत पूर्णतः ऑनलाइन माध्यम में 120 से अधिक शोध-पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस हेतु विदुषी अरुन्धती भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र द्वारा ज़ूम मंच पर 11 ब्रेकआउट रूम्स स्थापित किए गए, जिनमें 11 तकनीकी सत्र एक साथ संचालित हुए। ज़ूम मंच पर ब्रेकआउट रूम्स का निर्माण इस संगोष्ठी का एक सर्वथा अभिनव एवं सफल प्रयोग सिद्ध हुआ, जिसके माध्यम से सभी सत्रों का सुव्यवस्थित एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया गया।इन तकनीकी सत्रों में योग, आयुर्वेद, भाषा-साहित्य, संस्कृत, मनोविज्ञान, आईसीटी, सामाजिक-राजनीतिक चिंतन, विज्ञान, गणित, वाणिज्य तथा पर्यावरण जैसे विविध विषयों पर गहन विमर्श हुआ। द्वितीय दिवस के सत्रों में प्रमुख रूप से प्रो. राजेन्द्र सिंह (राज्जू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. आशुतोष कुमार सिंह, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. मार्कण्डेय नाथ तिवारी, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली के पूर्व मानविकी संकाय निदेशक प्रो. कौशल पंवार, दिल्ली विश्वविद्यालय के उप अधिष्ठाता, छात्र कल्याण डॉ. सुरेश कुमार गोहे, दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या डॉ. अंजू सेठ, महाराजा सुहेल देव राज्य विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के रूसा प्रमुख डॉ. अवनीन्द्र कुमार पाण्डेय, दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल महाविद्यालय के संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रूपेश चौहान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संजय कुमार केवट, दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन महाविद्यालय के इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री शोभन सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी महाविद्यालय के संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के वैदिक अध्ययन विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं आर्यभट्ट शोधपीठ के मानद निदेशक डॉ. आयुष गुप्ता, नागरिक पी.जी. कॉलेज, जौनपुर के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार पाण्डेय तथा शासकीय वी.बी.एस.डी. गर्ल्स कॉलेज, जशपुर (छत्तीसगढ़) के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।इन सत्रों के सफल संचालन में मैत्रेयी महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय के आन्तरिक निर्णायकों डॉ. नीलिमा ओहरी, डॉ. प्रज्वलित शिखा, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, डॉ. अनामिका सिंह, डॉ. अनीता देवी, डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, डॉ. बबीता चौधरी, डॉ. पवन एस. हर्साना, डॉ. वीना घुरियानी, सुश्री रिम्पी एवं डॉ. नवनीत किशोर—का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
ऑनलाइन माध्यम में 11 समानांतर सत्रों का सफल संचालन इस संगोष्ठी की एक विशेष उपलब्धि रही। एक साथ समानांतर सत्रों के माध्यम से अधिकाधिक समय शोध-पत्र वाचकों को प्राप्त हो सका तथा उनका अनुभव भी नवीन एवं अत्यंत उत्कृष्ट रहा, जिसने भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति बढ़ती अकादमिक रुचि एवं गंभीरता को स्पष्ट रूप से प्रतिबिम्बित किया।
