प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं को लेकर अभाविप ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं को लेकर अभाविप ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

रायपुर, 21 जनवरी 2025।प्रदेश के विश्वविद्यालयों से जुड़े प्रशासनिक विषयों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं में सामने आई गंभीर अनियमितताओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि मंडल ने महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका जी से राजभवन में भेंट कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश संगठन मंत्री श्री महेश साकेत, प्रदेश मंत्री श्री अनंत सोनी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री यज्ञदत्त वर्मा, प्रदेश सह मंत्री श्री प्रथम राव फुटाने एवं रायपुर महानगर मंत्री श्री सुजल गुप्ता शामिल रहे।

अभाविप ने ज्ञापन के माध्यम से चार प्रमुख विषयों पर राज्यपाल का ध्यान आकृष्ट किया।पहला विषय महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, पाटन (दुर्ग) में कुलसचिव पद को लेकर उत्पन्न असमंजस से संबंधित रहा, जहां एक ही समय में दो व्यक्तियों की नियुक्ति से प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बनी हुई है। परिषद ने इस पर स्पष्ट एवं एकरूप दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।दूसरे विषय में लोकभवन द्वारा जारी निर्देशों को लेकर अभाविप ने चिंता व्यक्त की, जिनसे विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के कर्मचारियों की राज्य शासन के प्रति प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है।

परिषद का मत है कि ऐसे निर्देश उच्च शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन एवं संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।तीसरे विषय के रूप में छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानन्द तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई के पूर्व कुलपति प्रो. एम. के. वर्मा के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट अब तक प्रस्तुत न होने पर असंतोष जताया गया तथा जांच में शीघ्रता लाने की मांग की गई।चौथे विषय में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में कुलपति की नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग की गई।

अभाविप ने कहा कि नियुक्त कुलपति पर पूर्व में भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक कुप्रबंधन के गंभीर आरोप रहे हैं, जिन पर सम्यक जांच आवश्यक है। विश्वविद्यालय की गरिमा, प्रशासनिक शुचिता एवं छात्रहित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई।इस अवसर पर प्रदेश मंत्री श्री अनंत सोनी ने कहा कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। कई विश्वविद्यालयों में आज भी स्थायी कुलपति एवं कुलसचिव नियुक्त नहीं हैं, वहीं एक विश्वविद्यालय में एक साथ दो कुलसचिवों की नियुक्ति प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।

उन्होंने लंबित जांचों में तेजी लाने तथा नियुक्ति व जांच संबंधी मामलों में कुलाधिपति के अनिवार्य अनुमोदन से जुड़े आदेशों पर पुनर्विचार का आग्रह किया।माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका जी ने प्रतिनिधि मंडल द्वारा प्रस्तुत सभी विषयों को गंभीरतापूर्वक सुना और शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करते हुए सभी बिंदुओं पर प्राथमिकता से विचार करने का आश्वासन दिया।

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