रावत जाति को केन्द्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग तेज, मुख्यमंत्री सहित शीर्ष अधिकारियों को ज्ञापन

दुर्ग। छत्तीसगढ़ राज्य की यादव समाज की उपजाति रावत को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की केन्द्रीय सूची में शामिल कराने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन (अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ) के प्रांताध्यक्ष भानु प्रताप यादव एवं छ.ग. प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, दुर्ग के जिलाध्यक्ष द्वारा कलेक्टर दुर्ग के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सहित केंद्र व राज्य के शीर्ष पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया है।

ज्ञापन में उल्लेख है कि छत्तीसगढ़ राजपत्र क्रमांक-293, दिनांक 27/06/2020 के तहत राज्य सूची में यादव एवं उसकी उपजाति रावत को शामिल किया जा चुका है। बावजूद इसके, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (केंद्रीय सूची) में रावत जाति दर्ज नहीं होने से यादव समाज की यह उपजाति सामान्य वर्ग में आ रही है, जिसके कारण उन्हें केन्द्रीय शासन की योजनाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।ज्ञापन में यह भी बताया गया कि छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर का पत्र क्रमांक 2474/1909/2015/25-2 (दिनांक 14/08/2025) तथा छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का पत्र क्रमांक 453/बैठक/पिवआ/2025 (दिनांक 10/06/2025) द्वारा अनुशंसा किए जाने के बावजूद अब तक केन्द्रीय सूची में रावत जाति का समावेश नहीं हुआ है।
समाज की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि छत्तीसगढ़ में यादव जाति की आबादी लगभग 32 लाख है, जो मुख्यतः दैनिक मजदूरी, पशुपालन, गाय-चराने जैसे कार्यों पर निर्भर है। शिक्षा के अभाव और केन्द्रीय योजनाओं का लाभ न मिलने से समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ रहे हैं।
अंत में मांग की गई कि छत्तीसगढ़ राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग की केन्द्रीय सूची में अनुक्रमांक-01 ‘अहीर’ के उपरांत ‘रावत’ तथा अंग्रेजी सूची में RAWAT / RAVAT दर्ज किया जाए। इस संबंध में माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री (भारत सरकार), राष्ट्रीय अध्यक्ष—राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, राज्यपाल छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, तथा संबंधित विभागों से शीघ्र कार्रवाई का आग्रह किया गया है।
