दीर्घ सेवा के बाद सम्मानपूर्ण विदाई, दुर्ग पुलिस ने दो कर्मियों को दी भावभीनी विदाई
दुर्ग। दुर्ग पुलिस द्वारा लंबे समय तक निष्कलंक सेवा देने वाले पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों को सम्मानित करने की परंपरा के तहत शनिवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गरिमामय सेवानिवृत्ति समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान सहायक उप निरीक्षक नेतराम पाल एवं प्रधान आरक्षक क्रमांक 1376 धनवा राम को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।कार्यक्रम में दोनों सेवानिवृत्त अधिकारियों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
लगभग 35 से 40 वर्षों तक पुलिस विभाग में सेवा देने वाले इन कर्मियों के योगदान को याद करते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके कार्यकाल की सराहना की। समारोह में उपस्थित सभी अधिकारियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।समारोह के दौरान सेवानिवृत्त अधिकारियों ने अपने लंबे सेवा अनुभव साझा किए। उन्होंने विभागीय अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, टीम भावना तथा जनता के प्रति संवेदनशीलता को पुलिस सेवा का मूल आधार बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल नौकरी नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा का प्रतीक है।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मणीशंकर चन्द्रा, उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) तनुप्रिया ठाकुर, निरीक्षक (एम) बृजमोहन सिंह राजपूत, निरीक्षक (एम) सावित्री धुर्वे, वरिष्ठ शीघ्रलेखक गोकुल राम देवंगन, सुरेन्द्र साहू सहित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।कार्यक्रम का वातावरण भावनात्मक एवं सम्मानपूर्ण रहा। सहकर्मियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दोनों अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति सदैव समर्पित रहे और विभाग के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
कर्तव्यनिष्ठा की मिसालदोनों सेवानिवृत्त कर्मियों ने अपने सेवा काल में कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण तथा जनसेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन उन्होंने पूरी निष्ठा, ईमानदारी और अनुशासन के साथ किया, जो आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है।दुर्ग पुलिस की अपीलइस अवसर पर अधिकारियों ने सभी पुलिस कर्मियों से आह्वान किया कि वे सेवा भावना, अनुशासन और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें तथा विभाग की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाएं।
यह कार्यक्रम दुर्ग पुलिस परिवार के लिए एक प्रेरक और भावनात्मक क्षण बन गया, जहां सेवा, समर्पण और सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
