नगर निगम दुर्ग की सामान्य सभा में बजट बहुमत से पारित, विकास को मिली नई रफ्तार

नगर निगम दुर्ग की सामान्य सभा में बजट बहुमत से पारित, विकास को मिली नई रफ्तार

दुर्ग, 17 मार्च। नगर पालिक निगम दुर्ग की बजट सामान्य सभा मंगलवार को श्रद्धेय मोतीलाल वोरा सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सभापति श्याम शर्मा ने की। इस अवसर पर महापौर श्रीमती अलका बाघमार, आयुक्त सुमित अग्रवाल, वित्त प्रभारी नरेंद्र बंजारे सहित जनप्रतिनिधि, पार्षदगण एवं निगम अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।बैठक की शुरुआत निर्धारित समय पर हुई और दिनभर विभिन्न मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई। अंततः वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट बहुमत से पारित किया गया, जिससे शहर के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रश्नकाल में उठे जनहित के मुद्देप्रातः 11:30 बजे से शुरू हुए प्रश्नकाल में पार्षदों ने शहर की मूलभूत समस्याओं जैसे सफाई व्यवस्था, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। निगम प्रशासन ने इन सुझावों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

‘खुशहाली और समृद्धि’ का बजट पेशमहापौर अलका बाघमार ने अपने बजट भाषण में वर्ष 2026-27 के बजट को शहर के समग्र विकास का रोडमैप बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट जनता की आवश्यकताओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो दुर्ग को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

करोड़ों के विकास कार्यों को स्वीकृतिसामान्य सभा में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी।सिकोला नाला निर्माण के लिए 316.62 लाख रुपएमिनीमाता चौक से महाराजा चौक तक पाइपलाइन शिफ्टिंग हेतु 439.50 लाख रुपएइसके अलावा नया बस स्टैंड की दुकानों के अतिरिक्त निर्माण को नियमित करने और कुशाभाऊ ठाकरे भवन के किराया निर्धारण जैसे प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए।

‘अटल परिसर’ निर्माण और मार्ग नामकरण पर सहमतिजेल तिराहा स्थित ठगड़ा बांध के किनारे “अटल परिसर” निर्माण का प्रस्ताव रखा गया, जहां भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की धातु प्रतिमा स्थापित की जाएगी।साथ ही महाराजा चौक से पुलगांव चौक मार्ग का नाम “पद्मश्री स्व. डॉ. सुरेन्द्र दुबे मार्ग” रखने का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।

पारदर्शिता और नियमों के पालन पर जोरबैठक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों एवं राज्य शासन की गाइडलाइन के अनुसार कार्यों को पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपादित करने पर जोर दिया गया। सभी प्रस्तावों को नियमानुसार प्रक्रिया में लाने की बात कही गई।

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