कामधेनु विश्वविद्यालय में “गाय पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास पर प्रशिक्षण का समापन”

कामधेनु विश्वविद्यालय में “गाय पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास पर प्रशिक्षण का समापन“

दुर्ग/ दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलपति डॉ.आर.आर.बी.सिंह के मार्गदर्शन तथा अधिष्ठाता डॉ सुशांत पाल, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ.मनोज गेंदले के कुशल नेतृत्व में पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा में गाय पालक किसानों एवं उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत ”गाय पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास” विषय पर 30 मार्च से 01 अप्रैल 2026 तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का समापन कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.आर.आर.बी. सिंह के मुख्य आतिथ्य, कुलसचिव डॉ.बी.पी.राठिया, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. मनोज गेंदले, अधिष्ठाता डॉ. सुशांत पाल, प्रशिक्षण आयोजक डॉ.रामचंद्र रामटेके, विश्वविद्यालय जनसंपर्क अधिकारी डॉ.दिलीप चौधरी, प्रशिक्षण विशेषज्ञ एवं समिति सदस्य डॉ.ओ.पी.दीनानी, डॉ.सुभाष वर्मा, डॉ. निशिमा, डॉ. भानु प्रकाश, डॉ.अविनाश सूर्यवंशी, अन्य प्राध्यापकों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, कर्मचारियों तथा महासमुंद से आए 30 प्रशिक्षणार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। इस प्रशिक्षण के आयोजन में महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्य पालन अधिकारी श्री हेमंत नंदनवार (आई.ए.एस.) ने एन.आर.एल.एम. योजना से वित्तीय सहायता प्रदान की। *निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. मनोज गेंदले ने अपने उद्बोधन* में बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए गायपालन एक सशक्त साधन बनता जा रहा है।

”गाय पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास” से न केवल पशुपालकों की आय बढ़ेगी अपितु महिलाओ तथा युवाओं को स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध होगें। *कुलपति डॉ.आर.आर.बी.सिंह* ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा समय-समय पर इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन का विशेष स्थान है। वैज्ञानिक पद्वति द्वारा गाय पालन कर छोटे एवं भूमिहीन किसान/पशुपालक भी अधिक से अधिक आर्थिक लाभ अर्जित कर सकते है, साथ ही ग्रामीण उद्यमी बनकर शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को ग्राम-स्तर पर रोजगार उपलब्ध करा सकते है। *अधिष्ठाता डॉ.सुशांत पाल* ने अपने उद्बोधन में बताया कि गाय का दूध और खाद्य उत्पादों की बाजार में लगातार बढ़ती मांग से यह व्यवसाय कम लागत में अधिक लाभ दने वाला सिद्व हो रहा है। प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सहयोग बकरी पालन एवं उद्यमिता विकास को नई दिशा प्रदान कर रहा है।

प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ की जलवायु के लिए उपयुक्त नस्लें, नस्ल सुधार, पोषण एवं प्रबंधन, आवास, चारा प्रबंधन, वैल्यू एडिशन, दुग्ध उत्पादन तकनीक, वैल्यू एडिशन, गाय में होने वाली परजीवी जनित रोग विभिन्न रोग एवं इनका रोकथाम, गाय पालन से लाभ, विभिन्न योजनाओं की जानकारी एवं बैंक लोन प्रोसेस की जानकारी दी गई। प्रोग्रेसिव किसान श्रीनिवासन एवं डॉ.जी.जी. बारले ने प्रशिक्षणार्थियों को कृषि विज्ञान केन्द्र अंजोरा, डेयरी फार्म, कॉलेज के डेयरी, चारा उत्पादन ईकाई, लाइवलीहुड बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर का भ्रमण कराया।

कार्यक्रम के समापन पर प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरण एवं फीडबैक लिया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ.रैना दोनेरिया एवम् डॉ.डी.के.जोलहे द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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