महर्षि चरक जयंती पर आयुर्वेद के संरक्षण और वैज्ञानिक विकास का संकल्प
नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026। विश्व आयुर्वेद परिषद, दिल्ली इकाई एवं प्रेमाधार रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड हॉस्पिटल, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में महर्षि चरक जयंती का भव्य आयोजन दीप विहार, रोहिणी सेक्टर-24 स्थित प्रेमाधार रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड हॉस्पिटल में किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश से आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, चिकित्सक, शिक्षक एवं विद्यार्थी शामिल हुए।कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, दिल्ली के डीन प्रो. महेश व्यास ने की।
मुख्य अतिथि एनसीआईएसएम के बोर्ड ऑफ आयुर्वेद के अध्यक्ष प्रो. अल्लम प्रभु तथा मुख्य वक्ता सीबीपीएसीएस के प्रोफेसर वैद्य योगेश पांडे रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। मंच संचालन वैद्य स्वामी नाथ मिश्र ने किया।मुख्य अतिथि प्रो. अल्लम प्रभु ने आयुर्वेद शिक्षा की गुणवत्ता एवं राष्ट्रीय आयुर्वेद शिक्षा मानकों पर विचार रखते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ना आवश्यक है।
मुख्य वक्ता वैद्य योगेश पांडे ने महर्षि चरक के योगदान और चरक जयंती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्व आयुर्वेद परिषद का वार्षिक सम्मेलन इस वर्ष अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ओखला में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों से सम्मेलन के लिए शीघ्र पंजीयन कराने की अपील की।एनसीआईएसएम के बोर्ड ऑफ एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत कनौजिया ने आयुर्वेद चिकित्सकों के लिए नैतिक आचरण एवं रोगी कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
सीबीपीएसीएस के निदेशक श्री मन्नू भाई गौर ने वैद्यों को महर्षि चरक के योगदान को आधुनिक चिकित्सा जगत में प्रभावी रूप से अपनाने का आह्वान किया।एनसीआईएसएम के बोर्ड ऑफ आयुर्वेद के सदस्य डॉ. के.के. द्विवेदी ने आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों को विद्यार्थियों द्वारा प्रारंभ से ही अपनाने की आवश्यकता बताई। डीडीयू अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राजेश कोहली ने आयुर्वेद चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डाला। तिब्बिया कॉलेज की आचार्या डॉ. संगीता मिश्र ने संहिताओं पर शोध को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष द्रव्यगुण डॉ. मीना देवगड़े ने कहा कि आयुर्वेद का महत्वपूर्ण आधार वनस्पतियां हैं। उन्होंने परिषद की वनांचल यात्राओं को निरंतर जारी रखने तथा वनवासियों के पारंपरिक ज्ञान को समझकर उसे संरक्षित एवं उपयोगी बनाने पर जोर दिया।कार्यक्रम में डॉ. महेश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. विजय कौशिक, डॉ. हिमांशु शेखर तिवारी, कर्मा आयुर्वेद, डॉ. शुभम रोहिल्ला, डॉ. अवधेश पांडेय, निदेशक स्वामी वैद्य शाला तथा डॉ. शिवानी मिश्रा पांडेय सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सहभागिता भी देखने को मिली।
जापान से श्रीमती मिहो अरोआका तथा इटली से श्री शुभ जी, अध्यक्ष स्कूल ऑफ आयुर्वेदा मिलानो, फ्रेंचेस्का एवं गाया ने सहभागिता की।कार्यक्रम के अंत में विश्व आयुर्वेद परिषद, दिल्ली के अध्यक्ष वैद्य डॉ. नामधार शर्मा ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परिषद आयुर्वेद को घर-घर तक पहुंचाने तथा “एकम स्वस्थं भारतम्” के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी।
कार्यक्रम के पश्चात सभी अतिथियों एवं आगंतुकों के लिए सहभोज का आयोजन किया गया।
