छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अस्थायी कर्मचारियों ने लगाया शोषण का आरोप, नियमितीकरण की मांग
दुर्ग /छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक दैनिक वेतनभोगी, संविदा, ठेका एवं हाउस कीपिंग अस्थायी कर्मचारी महासभा ने शुक्रवार को दुर्ग में प्रेसवार्ता कर बैंक प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। कर्मचारियों ने कहा कि बैंक में आउटसोर्सिंग के नाम पर सालों से शोषण किया जा रहा है।महासभा के पदाधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक में वर्तमान में 626 शाखाएं, 10 क्षेत्रीय कार्यालय और एक प्रधान कार्यालय है, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे हैं।
बैंक इन्हें 4 घंटे के काम पर बुलाता है, लेकिन पूरे दिन काम कराता है और 50 दिन बाद काम से हटा दिया जाता है। वेतन भुगतान भी परिजनों के नाम पर किया जाता है।कर्मचारियों ने बताया कि वे वर्ष 2017 से नियमितीकरण की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। हाईकोर्ट ने 60 दिनों में नियमितीकरण के लिए स्कीम बनाने का आदेश दिया था, लेकिन बैंक ने यह कहकर टाल दिया कि वे स्टेट बैंक के स्पॉन्सर हैं और भारत सरकार की पॉलिसी ऐसी नहीं है, जबकि अन्य ग्रामीण बैंकों में दैनिक वेतनभोगियों का नियमितीकरण किया जा चुका है।
महासभा ने बताया कि बैंक ने 2017 में ही आउटसोर्सिंग भर्ती शुरू कर दी थी, जबकि नीति 2022 में लागू की गई। भारत सरकार द्वारा डेटा मांगने पर बैंक ने शून्य जानकारी दी। अपनी मांगों को लेकर वे क्षेत्रीय श्रम आयुक्त और भारत सरकार को पत्र लिख चुके हैं।कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
