विश्व पर्यावरण दिवस पर भोपाल में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न
कबीरधाम की शिक्षाविद मालती गर्ग ने प्रमुखता से उठाए पर्यावरण एवं श्रमिकों के स्वास्थ्य के
भोपाल : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, ‘जन स्वास्थ्य अभियान’ (JSAI) द्वारा भोपाल के गांधी भवन में 5 जून 2026 को ‘व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य’ पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ (कबीरधाम जिले सहित), उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, बिहार, मणिपुर, असम, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के मजदूर संगठनों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, समुदाय के प्रतिनिधियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की चर्चा
चार मुख्य सत्रों—व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन तथा जल एवं वैश्विक ताप—में विभाजित किया गया था।कबीरधाम जिले से शिक्षाविद मालती गर्ग एवं सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत यादव ने सम्मेलन में भाग लिया। शिक्षाविद मालती गर्ग ने पर्यावरण एवं श्रमिकों के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से रखा, जिसे विशेषज्ञों द्वारा गंभीरता से लिया गया और रणनीतिक कार्ययोजना में शामिल किया गया।सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत में कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है। लाखों श्रमिक खनन, निर्माण, घरेलू कार्य और असंगठित क्षेत्रों में खतरनाक परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं।प्रतिभागियों
ने श्रम कानूनों के कड़े क्रियान्वयन और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सिलिकोसिस प्रभावित श्रमिकों ने अपने संघर्ष और चुनौतियों की आपबीती साझा की। जन स्वास्थ्य अभियान के अमूल्य निधि ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और व्यावसायिक स्वास्थ्य खतरों से बचाव के लिए सामूहिक जागरूकता और संगठित प्रयासों की आवश्यकता है।व्यावसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ जगदीश पटेल ने बताया कि कार्यस्थल पर जोखिम हर जगह मौजूद है। उन्होंने कहा कि 90 से अधिक ऐसे व्यवसाय हैं जिनसे सिलिकोसिस का खतरा होता है। एस्बेस्टस के संदर्भ में उन्होंने चिंता जताई कि भारत में इसकी माइनिंग पर रोक है, लेकिन आयात जारी है ।
सुश्री चुन्नी ने मजदूरों की कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं, अंग-भंग और मृत्यु की घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्हें उचित मुआवजा और सहायता दिलाने की आवश्यकता बताई।’पर्यावरण, जलवायु और स्वास्थ्य’ पर केंद्रित सत्र में खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान और जलवायु परिवर्तन के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभावों पर चर्चा हुई। अरावली संघर्ष समिति के कैलाश मीणा ने संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया। राजकुमार ने प्राकृतिक संसाधनों के तेजी से हो रहे ह्रास पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले 50 वर्षों में भारत की हजारों नदियां लुप्त हो चुकी हैं और वायु प्रदूषण प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख मौतों का कारण बन रहा है।राकेश
दीवान ने कहा कि हमें उन समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने आज भी जंगलों को संरक्षित कर रखा है।सम्मेलन के अंतिम सत्र में भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा हुई। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 10 दिसंबर 2026 (अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस) को एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। साथ ही, व्यावसायिक स्वास्थ्य और खतरनाक उद्योगों में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा पर ‘अंकलन रिपोर्ट’ (Assessment Report) तैयार करने और देश के 5 राज्यों में विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का स्वास्थ्य सर्वे करने का निर्णय लिया गया।इस वर्ष पूरे देश में चलाए गए ‘स्वास्थ्य दिवस अभियान’ को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही, ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार कोर्स’ की शुरुआत की जाएगी, जिसका पहला कार्यक्रम 1-7 सितंबर 2026 तक श्रीनगर में आयोजित होगा।कार्यक्रम को सफल बनाने में संजीव सिन्हा (उत्तर प्रदेश), गोरांग मोहपात्रा (ओडिशा), चंद्रकांत यादव, पुनिता कुमार, प्रकाश गार्डिया, डॉ. जितेंद्र सिंगरौल, डॉ. एच.डी. गांधी, अधिवक्ता रेखा साहू, चुन्नी कुमारी, मालती गर्ग, रामकुमार नागवंशी (छत्तीसगढ़), इफत राग (दिल्ली), राही रियाज (जम्मू-कश्मीर), हेमलता कंसोटिया (राजस्थान), मुकुट लोचन (असम) और ऋषिकान्त (मणिपुर) सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।जारीकर्ता:सचिवालय संपर्क: अमूल्य निधि (9425311547/9821253773), गोरांग मोहपात्रा (9437036305), चंद्रकांत यादव (9179364847), संजीव सिन्हा (9140654917), राही रियाज (7006578737)ईमेल: jsaindiasect@gmail.com
