दुर्ग-भिलाई में बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए पुलिस का अभियान तेज, 32 हजार लोगों का डेटा जुटाया
दुर्ग। दुर्ग-भिलाई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस अभियान के तहत एसटीएफ की टीम संदिग्धों की पड़ताल कर रही है। पुलिस ने लगभग 32 हजार लोगों का डेटा एकत्र किया है, जिनमें से 250 लोगों को शॉर्टलिस्ट कर जांच के दायरे में लिया गया है।जांच के सिलसिले में एसटीएफ की विशेष टीम पश्चिम बंगाल रवाना हुई है।
टीम ने मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद सहित सीमावर्ती जिलों में संदिग्धों के संबंध में जानकारी जुटाई है। जांच में फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका को भी ध्यान में रखा जा रहा है। बीएसपी समेत अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले करीब 30 हजार ठेका श्रमिकों और कर्मचारियों की सूची तैयार कर उनके पहचान संबंधी रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।पुलिस के अनुसार, दुर्ग में नौ साल से रह रही बांग्लादेशी महिला रीना अख्तर को जांच के बाद बांग्लादेश भेजा गया है।
वहीं, भिलाई में फर्जी आधार कार्ड के आरोप में पन्ना बीबी और सूरज साव की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। सुपेला पुलिस ने ज्योति रसैल उर्फ शाहिदा खातून और उनके पति मोहम्मद रसैल को भी गिरफ्तार किया है।पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के संबंध में सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-1905 जारी किया है।
दस्तावेजों के सत्यापन के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
