दुर्ग में अवैध अफीम की खेती का बड़ा खुलासा, 5 एकड़ से अधिक खेत में लगे पौधे जप्त – कीमत लगभग 8 करोड़

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध रूप से अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया है। थाना पुलगांव क्षेत्र के ग्राम समोदा, झेनझरी और सिरसा के बीच स्थित खेत में पुलिस व अन्य विभागों की संयुक्त कार्रवाई में करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में लगे अफीम के पौधे जप्त किए गए हैं। जप्त अफीम के पौधों की अनुमानित कीमत लगभग ₹8 करोड़ बताई जा रही है।पुलिस को सूचना मिली थी कि क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है।

सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच के दौरान पाया गया कि मक्का/भुट्टे की फसल के बीच-बीच में अफीम के पौधे लगाए गए थे, ताकि इसे छिपाया जा सके। इसके बाद पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL), आबकारी विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए पूरे खेत का निरीक्षण किया और अफीम की फसल जप्त कर ली।राजस्व विभाग की जांच में सामने आया कि यह भूमि ग्राम झेंझरी स्थित खसरा नंबर 309 और 310 की कुल 10 एकड़ 72 डिसमिल जमीन है।
मामले में विनायक ताम्रकार (58 वर्ष), विकास बिश्नोई (27 वर्ष) और मनीष ठाकुर (45 वर्ष) की संलिप्तता सामने आई है। पूछताछ में यह भी पता चला है कि अफीम की खेती के लिए बाहर से लोगों को बुलाकर काम कराया जा रहा था।पुलिस ने मामले में NDPS एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। जप्त अफीम के पौधों की न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत जुडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष सैंपलिंग भी की गई है, जबकि फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
इस कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर, मणिशंकर चन्द्रा, नगर पुलिस अधीक्षक हर्षित मेहर, एसडीओपी चित्रा वर्मा, सीएसपी सत्य प्रकाश सहित पुलगांव थाना पुलिस, जेवरा–सिरसा चौकी पुलिस, NCB, FSL, आबकारी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि नशीले पदार्थों के उत्पादन, परिवहन या तस्करी से जुड़ी किसी भी जानकारी की तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि ऐसे अपराधों पर सख्ती से कार्रवाई की जा सके।
