इलाज के नाम पर 14 वर्षीय आदिवासी छात्रा से दुष्कर्म, पांच माह की गर्भवती होने पर खुला मामला

कांकेर: इलाज के नाम पर 14 वर्षीय आदिवासी छात्रा से दुष्कर्म, पांच माह की गर्भवती होने पर खुला मामला;

44 वर्षीय कथित वैद्य गिरफ्तारताड़ोकी थाना क्षेत्र की घटना से सनसनी, नशीली दवा देकर बार-बार यौन शोषण करने का आरोप

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। ताड़ोकी थाना क्षेत्र में बीमारी का इलाज करने के बहाने 14 वर्षीय आदिवासी नाबालिग छात्रा के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किए जाने का आरोप है। मामले में पुलिस ने 44 वर्षीय आरोपी वैद्य रमेश कुमार पिस्दा को गिरफ्तार किया है। पीड़िता की मेडिकल जांच में उसके लगभग पांच माह की गर्भवती होने की पुष्टि होने के बाद घटना का खुलासा हुआ। इस मामले ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।

तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाने से हुआ खुलासा जानकारी के अनुसार, 17 अक्टूबर को पीड़िता की तबीयत बिगड़ने पर उसे अंतागढ़ अस्पताल ले जाया गया था। वहां चिकित्सकीय जांच के दौरान उसके लगभग पांच माह की गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू की गई।इलाज के बहाने शोषण करने का आरोप प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अप्रैल महीने में पीड़िता की तबीयत खराब होने पर आरोपी ने उसकी जांच करने के बहाने गर्भाशय में समस्या होने की बात कही थी।

आरोप है कि इसके बाद उसने पीड़िता को ताबीज दिया और कथित तौर पर नशीली दवा देकर बेहोशी की हालत में उसके साथ कई बार यौन शोषण किया।मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने पीड़िता से संबंधित जानकारी जुटाई और शिकायत के आधार पर कार्रवाई की। घटना में लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच की जा रही है।BNS और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाईपुलिस ने आरोपी रमेश कुमार पिस्दा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 और 65 तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

नाबालिगों की सुरक्षा पर फिर उठे सवालइस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के नाम पर लोगों का भरोसा जीतकर कथित रूप से उनका शोषण किए जाने जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा, उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और ऐसे मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराने की आवश्यकता एक बार फिर रेखांकित हुई है।फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है।

पीड़िता की पहचान और उससे जुड़ी निजी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है। मामले में आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।

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