देवांगन भवन पाटन में ‘सुशासन तिहार’ की बदहाल व्यवस्था, आवेदन जमा करने भटक रहे हितग्राही
पाटन। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने और मौके पर ही शिकायतों के निराकरण के उद्देश्य से आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर पाटन में अव्यवस्थाओं का शिकार नजर आया। देवांगन भवन में आयोजित शिविर में अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे लोगों को आवेदन जमा करने और पावती प्राप्त करने के लिए घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा।शिविर में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए थे, लेकिन अधिकांश विभाग सीधे आवेदन लेने से बचते दिखाई दिए।
हितग्राहियों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी उन्हें नगर पंचायत पाटन के स्टॉल पर भेज रहे थे, जिससे लोगों को बार-बार चक्कर काटने पड़े।विभागों की ‘पल्ला झाड़ो’ नीति से बढ़ी परेशानीशिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि जब वे अपनी शिकायत या आवेदन लेकर संबंधित विभाग के स्टॉल पर पहुंचे तो वहां मौजूद अधिकारियों ने आवेदन लेने से इनकार कर दिया। लोगों को यह कहकर नगर पंचायत के काउंटर भेज दिया गया कि वहीं से आवेदन की एंट्री और पावती जारी होगी।विद्युत विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि विभाग के पास सीधे आवेदन जमा करने की व्यवस्था नहीं है।
नगर पंचायत के माध्यम से आवेदन आने के बाद ही जांच और कार्यवाही की जाएगी।एक काउंटर पर सैकड़ों लोगों की भीड़सबसे अधिक परेशानी नगर पंचायत के एकमात्र अधिकृत काउंटर पर देखने को मिली, जहां दर्जनों विभागों से जुड़े आवेदन जमा किए जा रहे थे। एक ही कर्मचारी द्वारा रजिस्टर में प्रविष्टि किए जाने के कारण लंबी कतारें लग गईं।आवेदन जमा करने के लिए घंटों इंतजारपावती लेने में भारी देरीविभागों के बीच समन्वय का अभावएक स्टॉल से दूसरे स्टॉल तक भटकते रहे ग्रामीणग्रामीणों का कहना है कि जिन विभागों के स्टॉल लगाए गए हैं, यदि वे आवेदन स्वीकार ही नहीं कर रहे तो ऐसे स्टॉल लगाने का औचित्य क्या है।
लोगों ने आरोप लगाया कि शिविर में व्यवस्थाओं की कमी के कारण पूरा दिन बर्बाद हो गया।सुशासन पर उठे सवालशिविर में फैली अव्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की मंशा जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने की है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोगों को राहत मिलने के बजाय परेशानी झेलनी पड़ रही है।अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस अव्यवस्था और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर संज्ञान लेकर व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।
