भिलाई स्टील प्लांट में केमिकल डिजास्टर पर एसडीआरएफ-एनडीआरएफ की संयुक्त मॉक ड्रिल
दुर्ग, 20 अगस्त 2026। भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) परिसर में औद्योगिक एवं रासायनिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ द्वारा संयुक्त रूप से केमिकल डिजास्टर डेमोंस्ट्रेशन एवं मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन, एडीएम, एसडीएम तथा जिला सेनानी एवं जिला अग्निशमन अधिकारी दुर्ग श्री दिनेश कुमार रावटे के नेतृत्व में यह अभ्यास संपन्न हुआ।
मॉक ड्रिल में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा भिलाई स्टील प्लांट के सुरक्षा एवं अग्निशमन विभाग की टीमों ने रासायनिक आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया।गैस रिसाव से लेकर सुरक्षित निकासी तक का अभ्यासअभ्यास के दौरान जहरीली गैस अथवा केमिकल रिसाव की स्थिति में तत्काल अलार्म, लीकेज सीलिंग, वाल्व क्लोजिंग और पैचिंग तकनीक का सजीव प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही हजमत सूट एवं सेल्फ-कंटेंड ब्रीदिंग एपरेटस (SCBA) के उपयोग का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
गैस रिसाव से प्रभावित क्षेत्र से संयंत्र कर्मियों को हवा की दिशा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित तरीके से निर्धारित आपातकालीन असेंबली पॉइंट तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई।डीकंटामिनेशन और वाटर कर्टेन का प्रदर्शनरासायनिक पदार्थों के संपर्क में आए कर्मचारियों एवं बचाव दल के सदस्यों के शुद्धिकरण के लिए ऑन-साइट डीकंटामिनेशन शावर एवं वॉश कॉरिडोर के संचालन का अभ्यास किया गया। जहरीली गैस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए वाटर कर्टेन तथा रासायनिक आग पर नियंत्रण के लिए फोम तकनीक का प्रभावी उपयोग भी प्रदर्शित किया गया।
घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता का अभ्यासमॉक ड्रिल में गैस के प्रभाव से अचेत हुए कर्मियों को तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट, सीपीआर एवं प्राथमिक उपचार देने तथा एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया।अभ्यास में भिलाई स्टील प्लांट के सुरक्षा अधिकारी, सीआईएसएफ, तकनीकी स्टाफ तथा एसडीआरएफ-एनडीआरएफ की टीमों के करीब 120 से 150 सदस्यों ने भाग लिया।
इस दौरान रासायनिक आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के कड़ाई से पालन पर विशेष जोर दिया गया।संयुक्त मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी संभावित औद्योगिक एवं रासायनिक आपदा के दौरान बचाव एवं राहत दलों की तैयारियों, आपसी समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना रहा।
