आश्रम बना लापरवाही का अड्डा: बैगा बालिका की संदिग्ध मौत, प्रशासनिक संवेदनहीनता पर उठे सवाल

आश्रम बना लापरवाही का अड्डा: बैगा बालिका की संदिग्ध मौत, प्रशासनिक संवेदनहीनता पर उठे सवाल

कबीरधाम / कुकदूर क्षेत्र के आदिवासी आश्रमों में घोर लापरवाही का एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आवासीय विद्यालय पोलमी में कक्षा छठवीं में अध्ययनरत बैगा बालिका राजेश्वरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आदिवासी समाज में भारी आक्रोश भी पैदा कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रा राजेश्वरी की तबीयत आश्रम में अचानक बिगड़ गई थी। आश्रम स्तर पर ही उसे सुई लगाई गई, लेकिन इसके बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। हैरानी की बात यह है कि गंभीर अवस्था में होने के बावजूद छात्रा को उचित चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय, बेहोशी की हालत में ही उसे घर भेज दिया गया। रास्ते में ही उसकी तबीयत और बिगड़ी और घर पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ाने वाली बात यह रही कि पोस्टमार्टम के दौरान भी आश्रम का कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था।

इससे आश्रम प्रबंधन की उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ झलकता है।यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कुई क्षेत्र के बालक आश्रम में भी एक बैगा छात्र के साथ ऐसा ही अमानवीय व्यवहार सामने आया था। गंभीर रूप से बीमार छात्र को एंबुलेंस या चिकित्सा सुविधा देने के बजाय ट्रैक्टर से घर भेजा गया, जहां उसकी भी मौत हो गई थी।लगातार हो रही इन घटनाओं से स्पष्ट है कि कुकदूर क्षेत्र के आदिवासी आश्रमों में स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी,निगरानी तंत्र (मॉनिटरिंग) का पूर्ण अभाव,और जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीर लापरवाही खुलकर सामने आ रही है।

स्थानीय लोगों और आदिवासी समाज में इस घटना को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि विशेष पिछड़ी जनजाति के मासूम बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए बनाए गए ये आश्रम आखिर किसके भरोसे चल रहे हैं?अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह दर्दनाक घटना भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगी।

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