मैत्रेयी महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परम्परा पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ

नई दिल्ली, 15 अप्रैल 2026।दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध मैत्रेयी महाविद्यालय में “भारतीय ज्ञान परम्परा : अंतर्विषयक परिप्रेक्ष्य” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। विदुषी अरुन्धती भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन स्कूल ऑफ इंडिक स्टडीज़ (यूएसए) और काउंसिल ऑफ इंडिक स्टडीज़ एंड रिसर्च, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसके बाद डॉ. कुमुद रानी गर्ग ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। महाविद्यालय के कुलगीत ने आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। उद्घाटन सत्र में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सदस्य-सचिव प्रो. सच्चिदानन्द मिश्र मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व महानिदेशक एवं आयरलैंड के पूर्व राजदूत अखिलेश मिश्र सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए।

विशिष्ट अतिथियों में प्रो. सत्यपाल सिंह (चेयरपर्सन, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के डॉ. कृष्ण मोहन पाण्डेय ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. हरित्मा चोपड़ा ने की।

अपने उद्बोधनों में वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। अखिलेश मिश्र ने “यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे” के माध्यम से ज्ञान की एकात्मता को रेखांकित किया, जबकि प्रो. सत्यपाल सिंह ने वेद, व्यवस्था और परम्परा के परस्पर संबंधों को स्पष्ट किया। डॉ. कृष्ण मोहन पाण्डेय ने “सर्वं खल्विदं ब्रह्म” के सिद्धांत को समझाते हुए संस्कृत को ज्ञान-वहन की भाषा के रूप में अपनाने पर जोर दिया।

प्रो. सच्चिदानन्द मिश्र ने आयुर्वेद और भारतीय तर्कशास्त्र की वैज्ञानिकता को रेखांकित करते हुए ज्ञान की समग्रता पर बल दिया।संगोष्ठी में नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने केंद्र की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया तथा इस अवसर पर एब्स्ट्रैक्ट बुक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन नूपुर चावला और डॉ. अनीता ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. स्मृति सिंह ने प्रस्तुत किया।

उद्घाटन सत्र के बाद द्वितीय सत्र में 90 से अधिक ऑफलाइन शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिनके मूल्यांकन हेतु बाह्य विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। संगोष्ठी के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी सत्रों में दर्शन, विज्ञान, समाज, राजनीति, आयुर्वेद और शिक्षा जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श जारी रहेगा।इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सत्र 17 अप्रैल 2026 को मैत्रेयी महाविद्यालय में आयोजित होगा।

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