राजिम में ABVP का प्रांत अभ्यास वर्ग शुरू

“बंदूकधारी नक्सलवाद खत्म, अब वैचारिक नक्सलवाद से लड़ेंगे विद्यार्थी” – निलेश सोलंकी
राजिम, गरियाबंद। भगवान राजीव लोचन और भगवान कुलेश्वरनाथ की पावन नगरी राजिम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) छत्तीसगढ़ प्रांत का चार दिवसीय प्रांत अभ्यास वर्ग शुक्रवार से प्रारंभ हो गया। 12 से 15 जून तक आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में प्रदेशभर से पहुंचे कार्यकर्ताओं को संगठन की कार्यपद्धति, नेतृत्व क्षमता, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक दायित्वों से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. विकास पाण्डेय, अनंत सोनी, निलेश सोलंकी तथा महेश साकेत उपस्थित रहे।अभ्यास वर्ग में सदस्यता अभियान, आंदोलन की कार्यप्रणाली, प्रभावी भाषण कला, कार्यक्रम नियोजन तथा “स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम” जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस वर्ष शिविर में जीरो फूड वेस्ट और नो मोबाइल यूज जैसे नवाचार भी शामिल किए गए हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में अनुशासन, आत्मनियंत्रण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।
प्रांत अध्यक्ष डॉ. विकास पाण्डेय ने कहा कि विद्यार्थी परिषद का उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र से पहले आयोजित यह अभ्यास वर्ग विद्यार्थियों तक समाज की मूल भावना और सकारात्मक विचार पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।वहीं अखिल भारतीय जनजाति कार्य प्रमुख निलेश सोलंकी ने कहा कि विद्यार्थी परिषद केवल छात्र समस्याओं को उठाने वाला संगठन नहीं, बल्कि उनके समाधान का मार्ग दिखाने वाला संगठन भी है।
उन्होंने कहा कि संगठन विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक चेतना और नेतृत्व क्षमता का विकास करता है।अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “बंदूकधारी नक्सलवाद से देश काफी हद तक मुक्त हो चुका है, लेकिन वैचारिक नक्सलवाद यानी अर्बन नक्सल जैसी चुनौतियों के खिलाफ वैचारिक संघर्ष का दायित्व अब विद्यार्थियों और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर है।
”चार दिवसीय इस अभ्यास वर्ग में डॉ. आशुतोष मांडवी, चेतन सुखाड़िया तथा रामाधार बैंस सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के माध्यम से संगठन आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए कार्यकर्ताओं को वैचारिक, सामाजिक और संगठनात्मक रूप से तैयार
