शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की पहल, दुर्ग के 11 स्कूल बन रहे स्मार्ट , अगले सत्र से बच्चे पढ़ेंगे स्मार्ट क्लास में

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की पहल, दुर्ग के 11 स्कूल बन रहे स्मार्ट , अगले सत्र से बच्चे पढ़ेंगे स्मार्ट क्लास में

दुर्ग। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। क्षेत्र के कुल 21 शासकीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना की जा रही है, जिनमें से 11 विद्यालयों को पूर्णतः स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चे अब स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर, इंटरनेट एवं डिजिटल कंटेंट के माध्यम से आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा की दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के उरला, तितुरडीह एवं शक्तिनगर स्थित शासकीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास एवं स्मार्ट स्कूल तैयार हो रहे है।

शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय विद्यालयों में डिजिटल तकनीक आधारित आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्रम में स्मार्ट स्कूल और स्मार्ट क्लास की पहल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो रही है।प्रदेश सरकार स्पष्ट संकल्प है कि शासकीय विद्यालयों का शैक्षणिक वातावरण, संसाधन एवं अधोसंरचना निजी शिक्षण संस्थानों के समकक्ष विकसित हों, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग के बच्चों को समान अवसर और उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध हो सके।

स्कूल में प्रिंट रिच वातावरण – दुर्ग में विकसित किए जा रहे स्मार्ट स्कूलों में बच्चों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए कक्षाओं एवं परिसर की दीवारों पर आकर्षक और ज्ञानवर्धक प्रिंट रिच वातावरण तैयार किया जा रहा है। इन दीवारों पर विषयवार महत्वपूर्ण जानकारी, चित्र, चार्ट, सूत्र, मानचित्र, भाषा विकास सामग्री और प्रेरणादायक संदेशों को सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे बच्चों को पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़े और वे सहज रूप से सीख सकें। प्रिंट रिच वातावरण के माध्यम से विद्यार्थी हर समय अपने आसपास उपलब्ध शैक्षणिक सामग्री से जुड़कर निरंतर सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रहेंगे, जिससे वे समझ और रचनात्मकता की ओर ध्यान आकर्षित होगा।

स्मार्ट स्कूलो में तैयार किये जा प्रिंट रिच वातावरण का कार्य पूर्ण हो चुका है। प्राइमरी स्कूल में छोटे बच्चों के हिसाब से चित्र बनाये गये है हाई स्कूल में प्रैक्टिकल वर्क के अनुरूप चित्र बनाये गये है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× How can I help you?