धर्म ज्ञान के साथ संस्कारों की वृद्धि का माध्यम बनी धार्मिक परीक्षा

जय आनंद मधुकर रतन भवन में उत्साहपूर्वक संपन्न हुई ‘जैन संस्कार आरोहण पाठ्यक्रम’ की परीक्षा

दुर्ग। जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में राष्ट्र संत एवं मानव मिलन के संस्थापक श्री मणिभद्र मुनि जी महाराज तथा साध्वी श्री लक्ष्मी जी म.सा. के पावन सानिध्य में श्रमणसंघीय जैन धार्मिक परीक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित ‘जैन संस्कार आरोहण पाठ्यक्रम’ की धार्मिक परीक्षा रविवार को संपन्न हुई। दुर्ग केंद्र में लगभग 80 परीक्षार्थियों ने उत्साहपूर्वक परीक्षा में भाग लिया।परीक्षा दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक देशभर के विभिन्न केंद्रों पर एक साथ आयोजित की गई।
छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक क्षेत्रों में श्रावक-श्राविकाओं एवं विद्यार्थियों ने परीक्षा में सहभागिता की। अनेक परीक्षार्थियों ने पूरे वर्ष नियमित अध्ययन एवं तैयारी कर इस परीक्षा में भाग लिया।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ धार्मिक परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश बाफना, भारती श्रीश्रीमाल एवं हरीश श्रीश्रीमाल ने परीक्षार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि धार्मिक परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, संस्कार, स्वाध्याय और सद्शिक्षा को जीवन में उतारने का अवसर है। उन्होंने सभी से प्रत्येक वर्ष धार्मिक परीक्षा में भाग लेने तथा नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का आह्वान किया।
आयोजकों ने बताया कि ‘संस्कार, स्वाध्याय और सद्शिक्षा’ को ध्येय बनाकर इस पाठ्यक्रम को परीक्षा का स्वरूप दिया गया है। इसका उद्देश्य परीक्षार्थियों में निरंतर अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित करना और धार्मिक ज्ञान में वृद्धि करना है। धार्मिक ज्ञान व्यक्ति के जीवन में सद्विचार, सदाचार एवं आत्मचिंतन की भावना को मजबूत करता है।परीक्षा के आयोजन में सत्प्रेरिका एवं मार्गदर्शिका परम विदुषी महासती डॉ. श्री हेमप्रभा जी म.सा. का मंगल आशीर्वाद एवं प्रेरणा रही। आयोजकों एवं परीक्षार्थियों ने उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
जय आनंद मधुकर रतन भवन में परीक्षा को व्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने में कविता रतनबोहरा, श्रीमती मंजु सुराणा एवं ऋषिका गोलक्षा का विशेष सहयोग रहा। शांतिपूर्ण वातावरण में आयोजित परीक्षा में परीक्षार्थियों ने उत्साह के साथ सहभागिता करते हुए धार्मिक अध्ययन एवं संस्कारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की ।
