दुर्ग में टाइप-1 डायबिटीज के देश में सबसे ज्यादा 86 बच्चे, इंसुलिन पेन तो दिए… सूई नहीं!
दिन में 4 बार इंसुलिन जरूरी, नीडल की कमी से परिजन परेशानहर महीने चाहिए करीब 10,320 नीडल, उपलब्धता महज 3,500
दुर्ग। टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों के मामले में दुर्ग से सामने आई तस्वीर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। जिला अस्पताल के डीआईईसी में टाइप-1 डायबिटीज के 86 बच्चे पंजीकृत हैं, जिन्हें देश में सबसे ज्यादा संख्या बताया गया है। इन बच्चों को दिन में करीब 4 बार इंसुलिन की जरूरत पड़ती है।स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के लिए इंसुलिन पेन और अन्य जरूरी उपकरण तो उपलब्ध करा दिए, लेकिन इंसुलिन लगाने वाली नीडल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी।
यही वजह है कि जरूरतमंद परिवारों को नीडल के लिए बाजार का रुख करना पड़ रहा है।86 बच्चों के लिए हर महीने करीब 10,320 नीडल की जरूरत है, जबकि अब तक करीब 3,500 नीडल ही खरीदी जा सकी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब इंसुलिन रोजाना और दिन में चार बार जरूरी है, तो उसे लगाने के लिए नीडल की व्यवस्था क्यों नहीं?
इंसुलिन पेन हाथ में, लेकिन सुई के लिए भटकते परिवार—दुर्ग जिला अस्पताल की व्यवस्था पर बड़ा सवाल!
