सुशासन शिविर बना मत्स्य पालकों के लिए वरदान, आधुनिक उपकरणों से बढ़ी आय की उम्मीदजाल और आइस बॉक्स मिलने से आसान हुआ मछली पालन व विक्रय कार्यसुशासन तिहार 2026 के तहत दंतेवाड़ा जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में आयोजित सुशासन शिविर ग्रामीणों के लिए राहत और सुविधा का केंद्र बनते जा रहे हैं। शिविरों में जहां लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है, वहीं विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को आधुनिक उपकरण और सामग्री भी निःशुल्क वितरित की जा रही है।
इससे ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग शिविरों में पहुंच रहे हैं।इसी क्रम में विकासखंड कटेकल्याण के ग्राम भूसारास और हल्बारास में आयोजित शिविरों में मत्स्य विभाग द्वारा मत्स्य पालकों को उन्नत जाल और आइस बॉक्स वितरित किए गए। इन उपकरणों से मत्स्य पालन और मछली विक्रय का कार्य अब पहले से अधिक सुविधाजनक और लाभकारी हो सकेगा।ग्राम भूसारास निवासी मत्स्य कृषक हिड़मा मण्डावी ने बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से अपने 0.20 हेक्टेयर तालाब में रोहू, कतला और मृगल जैसी भारतीय मेजर कार्प मछलियों का पालन कर रहे हैं। इससे उन्हें प्रतिवर्ष 30 से 40 हजार रुपये की आय होती है। उन्होंने बताया कि पहले उनके पास मछली पकड़ने के लिए जाल उपलब्ध नहीं था और किराये से जाल लाकर काम करना पड़ता था।
लेकिन अब सुशासन शिविर में जाल मिलने से उनकी परेशानी दूर हो गई है और अतिरिक्त खर्च भी बचेगा।इसी तरह ग्राम भूसारास के ही मत्स्य कृषक महादेव मरकाम को विभागीय फुटकर मछली विक्रय योजना के तहत आइस बॉक्स प्रदान किया गया। महादेव ने बताया कि पहले तालाब से निकाली गई मछलियों को तुरंत बाजार पहुंचाना पड़ता था, क्योंकि संरक्षण की व्यवस्था नहीं होने से मछलियां खराब होने का खतरा बना रहता था। अब आइस बॉक्स मिलने से मछलियों को सुरक्षित रखकर बाजार तक ले जाना आसान हो जाएगा।
वहीं विकासखंड कुआकोंडा के ग्राम हल्बारास में आयोजित शिविर में मत्स्य कृषक परमेश्वर राना और सुनील कुमार भोयर भी लाभान्वित हुए। परमेश्वर राना पिछले आठ वर्षों से 0.50 हेक्टेयर तालाब में मछली पालन कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष 60 से 70 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि जाल के अभाव में मछली पकड़ने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब विभाग से जाल मिलने के बाद कार्य आसान हो गया है।इसी प्रकार सुनील कुमार भोयर को आइस बॉक्स मिलने से मछलियों को सुरक्षित तरीके से बाजार तक पहुंचाने में सहूलियत मिलेगी।
पहले उचित साधन नहीं होने के कारण मछलियों के खराब होने की आशंका बनी रहती थी।ग्रामीणों का कहना है कि शासन की मंशानुसार आयोजित सुशासन शिविरों ने उनकी आर्थिक और व्यवहारिक समस्याओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूरस्थ गांवों तक पहुंचकर समस्याओं का समाधान करने और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की यह पहल ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
