बस्तर में उम्मीदों की नई उड़ान, 3,800 दिव्यांगजनों को मिलेगा सहारा आईईडी और नक्सली हिंसा में अंग गंवाने वालों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण, मुख्यमंत्री साय ने किया शिविर का वर्चुअल शुभारंभ

जगदलपुर/रायपुर, 5 अक्टूबर 2026। लंबे समय तक नक्सली हिंसा और बारूदी सुरंगों की त्रासदी झेल चुका बस्तर अब शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। इसी दिशा में जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में तीन दिवसीय विशाल निःशुल्क दिव्यांगजन सहायता एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्चुअल माध्यम से शिविर का शुभारंभ किया।
बस्तर संभाग के चार जिलों से 3,800 से अधिक दिव्यांगजनों का पंजीयन किया गया है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह आयोजन केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब नक्सली हिंसा के दौर से निकलकर विकास की नई दिशा में अग्रसर है। सरकार पीड़ितों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद का अंत केवल सुरक्षा कार्रवाई से नहीं, बल्कि आईईडी और बारूदी सुरंगों में अपने अंग गंवाने वाले प्रत्येक नागरिक को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने से होगा। उन्होंने कहा कि पीड़ितों का पुनर्वास नक्सलवाद की अंतिम निशानी मिटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।शिविर में विशेषज्ञ मौके पर ही दिव्यांगजनों का नाप लेकर कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी और श्रवण यंत्र निःशुल्क दिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम मेडिकल परीक्षण कर प्रमाण पत्र तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी मौके पर उपलब्ध करा रही है।
पहले चरण में 5 से 7 अक्टूबर तक बस्तर, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुर के हितग्राहियों को लाभ मिलेगा। दूसरे चरण में 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा में संभाग के शेष जिलों के दिव्यांगजनों के लिए शिविर आयोजित होगा।
