पंडरिया के 17 आदिवासी गाँवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, ‘आदिवासी समता मंच’ ने छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

पंडरिया के 17 आदिवासी गाँवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, ‘आदिवासी समता मंच’ ने छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

कबीरधाम/रायपुर: कबीरधाम जिले के पंडरिया तहसील अंतर्गत बैगा बाहुल्य क्षेत्रों में आदिवासियों की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है। क्षेत्र के 17 गाँवों में वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर “आदिवासी समता मंच” ने छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन देकर अवगत कराया है। संस्था की प्रतिनिधि इंदु नेताम ने छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग (रायपुर) के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इन समस्याओं के त्वरित निराकरण की मांग की है।

आदिवासी समता मंच के अध्यक्ष इंदु नेताम व कार्यकर्त्ता अनिमा बनर्जी, प्रवीण शोरी, राजेश रंजन एवं ग्रामीण बैसाखु बैगा, शोभाराम , दशमी बाई बैगा, रमली बाई बैगा, गरभी बाई, अगर्निन बाई,शिवपाल बैगा,राम कुमार बैगा, जियालाल बैगा के द्वारा आदिवासी आयोग के अध्यक्ष रुप सिंह मंडावी से मिलकर सभी समस्याओं के समाधान के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा किया गया।*कागजों में सिमटा वन अधिकार कानून ज्ञापन में बताया गया कि पंडरिया के वनांचल क्षेत्रों में वन अधिकार कानून (FRA) के तहत मिलने वाले सामुदायिक वन संसाधन अधिकार, व्यक्तिगत वन अधिकार और पर्यावास अधिकार (Habitat Rights) से ग्रामीण अब भी वंचित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार आवेदन देने के बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीण आदिवासी समता मंच ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित समस्याओं को शासन के समक्ष रखा है:बिजली और पानी: कई गाँवों में विद्युतीकरण और शुद्ध पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं है।सड़क और आवागमन: सीसी रोड का निर्माण न होने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।शिक्षा: क्षेत्र में स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति या कमी के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

खेती और मेड़़बंदी: खेती में सुधार के लिए मेड़़बंदी और मरम्मत कार्यों की मांग लंबे समय से लंबित है।वृक्षारोपण पर विवाद एक गंभीर समस्या यह सामने आई है कि वर्ष 2005 के पूर्व से काबिज भूमि (चाहे अधिकार पत्र मिला हो या नहीं) पर प्रशासन द्वारा वृक्षारोपण किया जा रहा है, जिससे आदिवासियों के समक्ष जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया है। संस्था ने मांग की है कि पीवीएम (PVM) से संबंधित विसंगतियों को दूर कर आदिवासियों को उनकी जमीन का हक दिया जाए।”हम पिछले लंबे समय से पंडरिया के इन 17 गांवों में कार्य कर रहे हैं।

संबंधित विभागों को बार-बार आवेदन दिया गया, लेकिन समाधान शून्य रहा। हमें उम्मीद है कि विभाग अब इसे गंभीरता से लेगा।”— इंदु नेताम, आदिवासी समता मंचआदिवासी समुदायों ने शासन से विनती की है कि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार किया जाय। आदिवासी आयोग के अध्यक्ष ने विभिन्न समस्याओं को देखते हुए लोगों को आश्वासन दिया कि मार्च के अंतिम सप्ताह में गांवों में शिविर लगाकर समाधान करने का आश्वासन दिया ।

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