अबूझमाड़ के किसान अब अपनाएंगे औषधीय खेती, धमतरी में लेंगे विशेष प्रशिक्षण
“नई सुबह की ओर” अभियान के तहत 50 से अधिक आदिवासी कृषकों का अध्ययन प्रवास
नारायणपुर/अबूझमाड़:नक्सल प्रभाव से मुक्त हो रहे अबूझमाड़ क्षेत्र में अब विकास की नई राह खुलती नजर आ रही है। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए यहां के किसान अब औषधि एवं सुगंधित पौधों की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में 02 मई को नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के कोहकामेटा, कुरुषनार, कंदाडी, किहकाड़, कोडोली और बासिंगबाहर गांवों के 50 से अधिक आदिवासी कृषकों को Chhattisgarh State Medicinal Plant Board के माध्यम से धमतरी जिले में अध्ययन प्रवास सह प्रशिक्षण के लिए भेजा गया।
इस पहल के तहत किसानों को औषधीय पौधों की खेती से होने वाले लाभ, तकनीक और बाजार की संभावनाओं से अवगत कराया जा रहा है। “नई सुबह की ओर” अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रेरित करना है, जिनकी बाजार में अधिक मांग है और जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को धमतरी जिले के कंडेल गांव में ब्राह्मी और खस जैसे औषधीय पौधों की खेती का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया जाएगा। साथ ही इन फसलों की उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
इस कार्यक्रम में महिला स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती दुलारी ढीमर, जो खस, ब्राह्मी और बच की खेती की मास्टर ट्रेनर हैं, किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मार्गदर्शन कर रही हैं।
