विदेशी पर्यटकों को लुभा रहा कबीरधाम का बीरन हस्तशिल्पअमेरिका से पहुंचे पर्यटक बीरन कला देखने और सीखने, बैगा शिल्पकार श्रीबाई के हुनर की कमाल

कवर्धा – छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की अनूठी पारंपरिक कला बीरन हस्तशिल्प अब विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी विशिष्ट कला को करीब से देखने, इसकी बारीकियों को समझने और स्वयं बनाने सीखने के लिए अमेरिका से पर्यटक पहुंचे। इस दौरान बैगा समुदाय की महिला हस्तशिल्पकार श्रीबाई बैगा ने अपने पारंपरिक हुनर का प्रदर्शन किया और पर्यटकों को बीरन हस्तशिल्प बनाने की प्रक्रिया सिखाई।
कबीरधाम की पहचान बीरन कला के प्रति विदेशी पर्यटकों की रुचि स्थानीय परंपराओं और आदिवासी महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान की विशेषता को सामने लाती है। श्रीबाई बैगा के हाथों से तैयार होने वाले बीरन के आभूषण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं । बीरन हस्तशिल्प को व्यापक पहचान दिलाने और बैगा समुदाय की कला को नए लोगों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
घांस से तैयार की गई माला ने पर्यटकों को स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पादों की विशिष्टता से परिचित कराया। पर्यटकों ने बीरन की माला और अन्य हस्तशिल्प को करीब से देखा तथा यह जानने में रुचि दिखाई कि सामान्य दिखाई देने वाली घांस से इतनी सुंदर और आकर्षक कलाकृतियां बनाई जाती हैं।श्रीबाई बैगा ने सिखाई बीरन हस्तशिल्प की कलाश्रीबाई बैगा ने पर्यटकों के सामने बीरन हस्तशिल्प तैयार करने का प्रदर्शन किया। उन्होंने घांस से आभूषण बनाने की प्रक्रिया और उसमें आवश्यक हाथों के कौशल से परिचित कराया। पर्यटकों ने उन्हें काम करते हुए देखा और स्वयं भी बीरन हस्तशिल्प बनाने का अभ्यास किया।
पर्यटकों को तैयार उत्पाद देखने के साथ-साथ उसे बनाने की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव भी मिला। पारंपरिक कला को अपने हाथों से सीखना उनके लिए एक नया और रोचक अनुभव रहा। बीरन हस्तशिल्प केवल एक वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि बैगा समुदाय की परंपरा, रचनात्मकता और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली के प्रतीक के रूप में सामने आया।श्रीबाई बैगा का प्रयास है कि पारंपरिक कला को जीवंत बनाए रखने के लिए उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ नए लोगों से परिचित कराना है। विदेशी पर्यटक किसी स्थानीय महिला शिल्पकार से सीधे कला सीखते हैं, तो उनके माध्यम से उस कला की कहानी और सांस्कृतिक महत्व को व्यापक स्तर पर पहचान मिलने की संभावना बढ़ती है।
दुर्लभ घांस से बनते हैं आकर्षक श्रृंगार आभूषणबीरन हस्तशिल्प कबीरधाम जिले की विशिष्ट पारंपरिक कलाओं में से एक है। इसमें सूताखड़ घांस के उपयोग करके हाथों से श्रृंगार सामग्री और आकर्षक आभूषण तैयार किए जाते हैं। इस कला में स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग, पारंपरिक ज्ञान और शिल्पकारों का अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।बैगा समुदाय की महिलाओं के पास प्रकृति और जंगल से जुड़े पारंपरिक ज्ञान की समृद्ध विरासत है। बीरन हस्तशिल्प इसी विरासत का एक सुंदर उदाहरण है।
घांस को सावधानीपूर्वक आकार देकर उपयोगी और आकर्षक उत्पाद तैयार करना धैर्य, अभ्यास और कुशल हाथों का काम है।आज बाजार में मशीनों से बने उत्पादों की भरमार है, ऐसे समय में प्राकृतिक सामग्री से हाथों द्वारा तैयार होने वाले बीरन हस्तशिल्प की अपनी अलग पहचान है। इसकी विशेषता केवल इसकी सुंदरता नहीं, बल्कि इससे जुड़ी स्थानीय संस्कृति और महिलाओं का पारंपरिक कौशल भी है।श्रीबाई बैगा के हुनर से महिलाओं के लिए खुल रही नई राहश्रीबाई बैगा बीरन हस्तशिल्प के माध्यम से बैगा महिलाओं के हुनर और पारंपरिक कला को पहचान दिलाने का प्रयास कर रही हैं। इस तरह की कला को प्रशिक्षण, उत्पादों में विविधता और उचित बाजार से जोड़कर महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।बीरन की माला के अलावा कानों के आभूषण, कंगन, अन्य श्रृंगार सामग्री और सजावटी उत्पादों के विकास की भी संभावनाएं हैं।
इस कला को बेहतर डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार उपलब्ध कराते हुए बैगा महिलाओं की आय बढ़ाने तथा पारंपरिक ज्ञान को आजीविका से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।बीरन हस्तशिल्प से बढ़ सकता है आर्ट एंड कल्चर टूरिज्म कबीरधाम की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को एक साथ जोड़कर आर्ट एंड कल्चर टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सकता है। पर्यटकों को बीरन हस्तशिल्प बनाते हुए दिखाना, उन्हें इसे स्वयं बनाने का अवसर देना और स्थानीय शिल्पकारों से सीधे संवाद कराना पर्यटन को एक सार्थक अनुभव बना सकता है।36 माउंटेन के युवा खेमलाल साहू और ग्रामोदय की टीम पर्यटकों को स्थानीय कला और संस्कृति से जोड़ने में सहयोग कर रहे हैं। इन्हीं के प्रयासों से पर्यटकों को श्रीबाई बैगा शिल्पकारों के हुनर को करीब से जानने का अवसर मिला है।
स्थानीय कला, वैश्विक आकर्षणअमेरिका से पहुंचे पर्यटकों द्वारा बीरन हस्तशिल्प को देखना और सीखना कबीरधाम की इस पारंपरिक कला के लिए उत्साहजनक पहल है। श्रीबाई बैगा के हाथों का हुनर यह दिखाता है कि स्थानीय परंपराओं में दुनिया को आकर्षित करने की क्षमता है।
