लोखान खदान बना खतरे का गड्ढा: 30 मीटर खुदाई और ब्लास्टिंग से गांव दहशत में

लोखान खदान बना खतरे का गड्ढा: 30 मीटर खुदाई और ब्लास्टिंग से गांव दहशत में

कवर्धा (पंडरिया)।कुकदूर के समीप ग्राम लोखान में संचालित श्याम तंबोली की पट्टा खदान अब गंभीर विवाद का विषय बन गई है। खदान में लगभग 30 मीटर गहरी खुदाई और लगातार हो रही भारी ब्लास्टिंग से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन गतिविधियों ने न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ दिया है, बल्कि जनजीवन और वन्यजीवों पर भी संकट खड़ा कर दिया है।

जलस्तर गिरने से बढ़ी चिंताग्रामीणों के अनुसार खदान की अत्यधिक गहराई के कारण आसपास के जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। कई कुएं और हैंडपंपों में पानी का स्तर पहले की तुलना में काफी नीचे चला गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गहरी खुदाई से भू-जल संतुलन प्रभावित होता है, जिससे जल संकट गहराने की आशंका रहती है।पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत खनन कार्यों में जल संरक्षण और रिचार्ज योजना अनिवार्य होती है, लेकिन ग्रामीणों का सवाल है कि क्या इन नियमों का पालन किया जा रहा है।

ब्लास्टिंग से कांप रहे मकानखदान में हो रही भारी ब्लास्टिंग से गांव के मकान तक हिल रहे हैं। कई घरों की दीवारों में दरारें पड़ने की शिकायत सामने आई है। नियमों के अनुसार ब्लास्टिंग सीमित मात्रा और तय कंपन सीमा के भीतर की जानी चाहिए, साथ ही आबादी से सुरक्षित दूरी जरूरी है।ग्रामीणों का आरोप है कि न तो कंपन मापने की कोई व्यवस्था है और न ही नियमित तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा है।वन्यजीवों पर भी मंडरा रहा खतराखदान के पास वन क्षेत्र होने के कारण वन्यजीवों पर भी खतरा बढ़ गया है।

लगातार हो रहे विस्फोट और मशीनों की आवाज से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उनके पलायन की स्थिति बन रही है।जांच और कार्रवाई की मांगग्रामीणों ने प्रशासन से खदान की गहराई, ब्लास्टिंग मानकों, जलस्तर पर प्रभाव और पर्यावरणीय नियमों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और खनन कार्य पर नियंत्रण लगाने की भी मांग उठ रही है।

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