बैगा संस्कृति के संरक्षण को नई उड़ान, दमगढ़ पहुँचे संगीत नाटक अकादमी के अधिकारी एवं पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय

पंडरिया (कबीरधाम)। बैगा जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में संचालित गुरु-शिष्य परंपरा कला दीक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत पंडरिया विकासखंड के बैगा बाहुल्य ग्राम दमगढ़ में एक गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के अधिकारी दीपक जोशी तथा पद्मश्री सम्मानित अनूप रंजन पांडेय ने बैगा लोकनृत्य प्रशिक्षण का अवलोकन किया।
आगमन पर बैगा समाज ने अपनी पारंपरिक बीरन माला पहनाकर दोनों अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।कार्यक्रम में बताया गया कि विगत एक वर्ष से गुरु माता श्रीमती पूनिया बाई कडमिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार से सम्मानित धनीराम कडमिया के मार्गदर्शन में बैगा लोकनृत्य का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। इस दौरान प्रशिक्षित 5 बैगा बालिकाओं एवं 5 बैगा बालकों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से अतिथियों का दिल जीत लिया।संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा इस प्रशिक्षण का समय-समय पर ऑनलाइन मूल्यांकन भी किया जाता रहा है।
प्रशिक्षण की उत्कृष्ट प्रगति को देखते हुए आगामी एक वर्ष के लिए पुनः 5 नई बालिकाओं एवं 5 नए बालकों का चयन कर प्रशिक्षण जारी रखने का निर्णय लिया गया।कार्यक्रम में संगतकार के रूप में परसराम, संतराम, मोहन सिंह एवं कुंवर सिंह ने अपनी कला से प्रस्तुति को जीवंत बनाया। बैगा समाज के प्रमुख अध्यक्ष इतवारी राम मछिया एवं बुध सिंह बैगा की गरिमामयी उपस्थिति रही।विशिष्ट अतिथि गोपी कृष्णा सोनी (शिक्षक, लेखक एवं बैगा संस्कृति शोधकर्ता) ने इस अवसर पर अपनी शोध आधारित पुस्तक अतिथियों को भेंट कर बैगा संस्कृति के दस्तावेजीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में जे. के. वर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक, कलाकार एवं बैगा समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।बैगा लोकनृत्य एवं लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए यह आयोजन न केवल प्रेरणादायी रहा, बल्कि जनजातीय कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ।
