गरियाबंद से ओडिशा तक 200 किलोमीटर पीछा, जिंदा पैंगोलिन के साथ 5 तस्कर गिरफ्तार

गरियाबंद। गरियाबंद से शुरू हुई जिंदा पैंगोलिन की तस्करी का मामला करीब 200 किलोमीटर दूर ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के पालमा में जाकर खत्म हुआ। वन विभाग की एंटी पोचिंग टीम ने साहस और सतर्कता के साथ तस्करों का पीछा करते हुए सरकारी इंटकवेल की इमारत में दबिश दी और करीब 7 किलो वजनी जिंदा पैंगोलिन को सुरक्षित बरामद कर लिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस और वन विभाग की टीम ने मौके से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

वन विभाग को सूचना मिली थी कि गरियाबंद क्षेत्र से जिंदा पैंगोलिन का सौदा करने के लिए तस्करों का एक गिरोह सक्रिय है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एंटी पोचिंग टीम ने संदिग्धों की गतिविधियों पर निगरानी शुरू की। टीम को जैसे-जैसे तस्करों के मूवमेंट की जानकारी मिलती गई, वैसे-वैसे उनका पीछा किया गया।

तस्कर गरियाबंद से निकलकर देवभोग और कालाहांडी होते हुए ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के पालमा तक पहुंचे। वन विभाग की टीम भी लगातार उनके पीछे लगी रही। करीब 200 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद टीम को तस्करों के संभावित ठिकाने की जानकारी मिली।

बताया गया कि पालमा में सरकारी इंटकवेल की इमारत में रात करीब 9 बजे वन विभाग की एंटी पोचिंग टीम ने दबिश दी। अचानक हुई कार्रवाई से वहां मौजूद तस्करों में हड़कंप मच गया। टीम ने मौके से लगभग 7 किलो वजन का जिंदा पैंगोलिन बरामद किया। पैंगोलिन को सुरक्षित कब्जे में लेकर वन विभाग की निगरानी में रखा गया है।

कार्रवाई के दौरान पालमा निवासी बालकृष्ण हाटी और सोनू हाटी तथा देवभोग निवासी रोशन ठाकुर सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वन विभाग की टीम अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

चीन में पैंगोलिन के शल्कों की अवैध मांग

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार पैंगोलिन दुनिया के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले वन्यजीवों में शामिल है। इसके शल्कों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध मांग बताई जाती है। विशेष रूप से चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में इसके शल्कों का इस्तेमाल कथित पारंपरिक औषधीय मान्यताओं के कारण किया जाता है। वहीं, कुछ क्षेत्रों में तांत्रिक धारणाओं और अंधविश्वासों के चलते भी पैंगोलिन तथा उसके अंगों की मांग बनी हुई है।

इसी अवैध मांग के कारण वन क्षेत्रों से पैंगोलिन को पकड़कर तस्करी करने वाले गिरोह सक्रिय रहते हैं। जिंदा पैंगोलिन को पकड़कर लंबी दूरी तक ले जाना वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर खतरा माना जाता है।

अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच में जुटा विभाग

पैंगोलिन की बरामदगी के बाद वन विभाग की जांच अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि पैंगोलिन को किससे खरीदा गया था, इसका अंतिम खरीदार कौन था और इसके पीछे कौन सा अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क सक्रिय है।

जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गरियाबंद क्षेत्र से पहले भी कितने पैंगोलिन को इसी नेटवर्क के माध्यम से ओडिशा अथवा अन्य राज्यों तक पहुंचाया गया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर वन विभाग तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।

वन विभाग की इस कार्रवाई को वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। करीब 200 किलोमीटर तक लगातार निगरानी और पीछा करने के बाद जिंदा पैंगोलिन की बरामदगी ने यह भी साबित किया है कि वन्यजीव तस्करों के खिलाफ विभाग की निगरानी और कार्रवाई लगातार जारी है।

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