नकटी गांव में बरसात से पहले गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई अमानवीय एवं असंवेदनशील — मुकेश साहू
रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के लगभग 4 बजे बिजली आपूर्ति बंद कर प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर लगभग 80 से 95 मकानों को ध्वस्त किए जाने की घटना अत्यंत दुखद, अमानवीय और संवेदनहीन है। इस कार्रवाई के बाद अनेक परिवार, जिनमें छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं, खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए।दुर्ग जिला शहर कांग्रेस महामंत्री मुकेश साहू ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि बरसात के ठीक पहले गरीब एवं मेहनतकश परिवारों को बेघर करना मानवीय मूल्यों के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि दो दिन पूर्व ही ग्रामीणों ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की थी, जहां उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बरसात के मौसम में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी तथा प्रशासन और ग्रामीणों के बीच समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन इसके विपरीत अचानक कार्रवाई कर लोगों का विश्वास तोड़ा गया।मुकेश साहू ने कहा कि विधायक कॉलोनी निर्माण के नाम पर 95 से अधिक परिवारों को बेघर कर दिया गया। यह केवल मकानों का ध्वस्तीकरण नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन, सम्मान और भविष्य पर सीधा प्रहार है।
कार्रवाई के दौरान सामने आए दृश्य अत्यंत मार्मिक थे, जहां लोग अपने घरों का सामान सड़क पर निकालकर बैठे थे और बुजुर्ग अपने टूटे हुए आशियानों के मलबे के बीच मासूम बच्चों को गोद में लेकर असहाय दिखाई दे रहे थे।उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान कई बच्चे सुबह से भूखे-प्यासे थे। घरों में भोजन भी तैयार नहीं हो पाया था कि पुलिस एवं नगर निगम की टीम पहुंचकर मकानों को तोड़ने लगी। इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी मानसिक एवं शारीरिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।दुर्ग जिला शहर कांग्रेस महामंत्री मुकेश साहू ने कहा कि यह कार्रवाई अत्यंत असंवेदनशील और निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने छत्तीसगढ़ के नागरिकों, विशेषकर गरीब और वंचित वर्ग के हितों की लगातार उपेक्षा कर शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है।मुकेश साहू ने आरोप लगाया कि इस घटना से स्पष्ट होता है कि भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं में आम और गरीब परिवारों के बजाय प्रभावशाली एवं बड़े आर्थिक हितों को अधिक महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गरीब परिवार लगातार विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कहीं लोगों के घर तोड़े जा रहे हैं, कहीं बढ़े हुए बिजली बिलों का बोझ डाला जा रहा है और किसानों को खाद एवं कृषि संबंधी सुविधाओं में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इन परिस्थितियों में गरीब, किसान और श्रमिक वर्ग स्वयं को लगातार प्रताड़ित और उपेक्षित महसूस कर रहा है।मुकेश साहू ने राज्य सरकार से मांग की कि प्रभावित सभी परिवारों के पुनर्वास की तत्काल समुचित व्यवस्था की जाए, उन्हें पर्याप्त मुआवजा दिया जाए तथा भविष्य में किसी भी बेदखली या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संवाद और वैकल्पिक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि जनहित की अनदेखी कर इस प्रकार की कार्रवाई करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और सरकार को इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
