18 राज्यों के शिक्षकों के बीच सुमित पाण्डेय ने पेश की छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पर्यटन की पहचान बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

गुवाहाटी में सुमित पाण्डेय ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

राष्ट्रीय स्तरीय प्रशिक्षण में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और पर्यटन स्थलों से देशभर के शिक्षकों को कराया परिचित असम के गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और पारंपरिक कलाओं की झलक देखने को मिल रही है।

सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण परिषद (सीसीआरटी), नई दिल्ली के तत्वावधान में 5 से 14 अक्टूबर तक आयोजित इस प्रशिक्षण में देश के 18 राज्यों के 159 प्रशिक्षार्थी भाग ले रहे हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के 15 शिक्षक शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के दल का नेतृत्व कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कामठी में पदस्थ शिक्षक सुमित पाण्डेय कर रहे हैं।

लोक संस्कृति के माध्यम से प्रस्तुत की छत्तीसगढ़ की पहचान*प्रशिक्षण के दौरान शिक्षक सुमित पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, राजकीय प्रतीकों, खानपान, रहन-सहन, पारंपरिक वेशभूषा, औद्योगिक क्षेत्रों, प्राकृतिक सौंदर्य और प्रमुख त्योहारों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने सुआ, करमा, पंडवानी, राउत नाचा और ददरिया जैसी लोक परंपराओं एवं लोककलाओं के माध्यम से प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान से अन्य राज्यों के शिक्षकों को परिचित कराया। इस पहल से देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षकों को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।

भोरमदेव मंदिर की विशिष्टता से परिचित हुए देशभर के शिक्षक कबीरधाम जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भोरमदेव मंदिर के बारे में जानकर प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों ने विशेष रुचि दिखाई। छत्तीसगढ़ के खजुराहो के नाम से प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर की स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्त्व को साझा करते हुए सुमित पाण्डेय ने प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। इसके साथ ही देवानपटपर, उल्टापानी, चित्रकोट जलप्रपात, कोटमसर गुफा और तीरथगढ़ जलप्रपात जैसे प्रमुख प्राकृतिक एवं पर्यटन स्थलों की जानकारी भी साझा की गई। इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की संभावनाओं को बल मिला है।

*पारंपरिक कलाओं के साथ कला आधारित शिक्षण पर जोर*प्रशिक्षण कार्यक्रम में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ व्यावहारिक गतिविधियों को भी विशेष महत्त्व दिया जा रहा है। प्रशिक्षार्थियों को जूट कला, टेराकोटा कला, केन एवं बांस शिल्प, लोक चित्रकला, कठपुतली निर्माण तथा माइम एंड मूवमेंट जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कलाओं से परिचित कराने के साथ कला आधारित शिक्षण की नई विधियों से जोड़ना है, ताकि वे कक्षा में विद्यार्थियों को भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं से अधिक रोचक एवं प्रभावी तरीके से परिचित करा सकें।

प्रशासनिक अधिकारियों ने दी शुभकामनाएं इस प्रशिक्षण यात्रा के लिए कबीरधाम जिले की कलेक्टर तुलिका प्रजापति और जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा ने शिक्षक सुमित पाण्डेय को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जिले की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन स्थलों और गन्ना जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों की पहचान को असम सहित देश के अन्य राज्यों तक पहुंचाने के प्रयासों को प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधित्व की सराहना सीसीआरटी गुवाहाटी के क्षेत्राधिकारी शशांक कुमार पाण्डेय, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ की आयुक्त किरण कौशल, उपसंचालक दिनेश कौशिक, सहायक संचालक मंजुलता साहू, सहायक कार्यक्रम समन्वयक राखी सिन्हा, डीएमसी समग्र शिक्षा विनोद श्रीवास्तव, विकासखंड शिक्षा अधिकारी पंडरिया दीपक ठाकुर, विकासखंड स्रोत समन्वयक राममुरारी यादव तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कामठी की प्राचार्य हेमलता टंडन ने की।राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और पर्यटन संपदा को प्रस्तुत करने का यह प्रयास प्रदेश की पहचान को व्यापक बनाने के साथ शिक्षकों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कला आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण पहल है।

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